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जेलर हत्याकांड में दो डिप्टी जेलरों को मिली उम्रकैद!
एजेंसी
| Mar 30, 2012, 17:36PM IST
घटना के वक्त एक आरोपी के जेल में बंद होने के कारण अदालत ने उसे हत्या में शामिल मानने से इंकार कर दिया। वहीं इस मामले में वरिष्ठ अधीक्षक यादवेन्द्र शुक्ला को षड्यंत्र रचने का आरोपी बनाया गया था लेकिन उनका मामला अभी अंडर ट्रायल चल रहा है।
जेल अधीक्षक नरेन्द्र द्विवेदी की 7 अगस्त 2007 को जेल चुंगी के निकट ही सायं को करीब साढ़े छह बजे बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी।
घटना के वक्त नरेन्द्र द्विवेदी अपनी पत्नी के साथ बाजार से सामान खरीदने के बाद जेल परिसर की ओर लौट रहे थे। सरेआम जेलर की हत्या ने पुलिस महकमें को हिलाकर रख दिया था.
इस मामले में नरेन्द्र द्विवेदी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कासिफ शेख ने बताया कि घटना में उस समय नया मोड़ आ गया जब पुलिस जांच में दो डिप्टी जेलर सहित कई जेलकर्मियों का शामिल होना पाया गया।
मामले में ज्ञानेन्द्र, धम्रेन्द्र लाल, योगेन्द्र उर्फ जोगेन्द्र, सुकरमपाल, पिन्टु उर्फ संजय, विनोद गुर्जर, अजय जडेजा व धम्रेन्द्र किरठल को 302 धारा का मुजरिम बनाया गया, जबकि जेल में तैनात दो डिप्टी जेलर राजीव कुमार सिंह व अविनाश चौहान के खिलाफ भी 120 बी के तहत मामला दर्ज कराया गया। बाद में वरिष्ठ अधीक्षक यादवेन्द्र शुक्ला को षड्यंत्र रचने का आरोपी बनाया गया था।
स्पेशल जज एसके अग्रवाल ने इस मामले में बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुना दिया। अदालत ने अपने फैसले में ज्ञानेन्द्र, धम्रेन्द्र लाला, योगेन्द्र उर्फ जोगेन्द्र, सुकरमपाल, पिन्टु उर्फ संजय, अजय जडेजा व धम्रेन्द्र किरठल को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
बरी होने के बाद अदालत से बाहर आए विनोद गुर्जर ने बताया कि हत्या के समय वह जेल में बंद था। इसी कारण अदालत ने उसे बरी कर दिया। डिप्टी जेलर राजीव कुमार सिंह व अविनाश चौहान को दोषी मानते हुए अदालत ने आजीवन कारावास व 25-25 हजार रुपये का आर्थिक दण्ड की सजा सुनाई।
आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद डिप्टी जेलर राजीव कुमार सिंह व अविनाश चौहान के परिजनों में कोहराम मच गया। उनके अन्य सहयोगियों ने किसी तरह उन्हें ढांढस बंधाया। एक अन्य आरोपी यादवेन्द्र शुक्ला का मामला इस चार्जशीट में नहीं था। इसलिये उनका मामला अभी अन्डर ट्रायल चल रहा है।






