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क्या होता अगर गांधी 10 साल और जीते...

 
Source: एजेंसी   |   Last Updated 18:53(30/01/12)
 
 
 
 
आगरा। महात्मा गांधी की हत्या से किसे लाभ मिला? क्या होता यदि वह 10 साल और जिंदा रह जाते?

ये वे सवाल हैं, जिन पर ताज शहर में गांधीवादियों ने सोमवार को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर चर्चा की। बहुत से गांधीवादियों ने इसे बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी बताया। उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता के बाद गांधीजी की मौजूदगी भारतीय राजनीति तथा सरकार के प्रति अलग रुख पेश करती।

गांधी को नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी, 1948 को गोली मार दी थी।

गांधीवादी व वरिष्ठ कांग्रेस नेता सतीश चंद्र गुप्ता (86) ने कहा, "यदि गांधीजी अगले 10 साल या इससे अधिक समय के लिए जिंदा रह जाते तो हालात अलग होते। महात्मा गांधी का हत्यारा निश्चित रूप से अपने मिशन व उद्देश्यों में विफल रहा। हत्यारे को कलंकित छवि के अतिरिक्त और क्या मिला, जिससे वह आज तक उबर नहीं पाया?"

दक्षिण-पूर्वी एशिया के विशेषज्ञ एवं टीकाकार पारस नाथ चौधरी ने कहा, "यदि गांधी दो वर्ष भी और जी जाते तो कांग्रेस पर या तो प्रतिबंध लगा दिया जाता या इसके मौलिक स्वरूप की पुर्नसचरना होती।"

इंडियन पीपुल्स थियेटर एसोसिएशन (इप्टा) के महासचिव जितेंद्र रघुवंशी ने कहा, "यदि गांधी कुछ और समय के लिए जिंदा रहते तो विभाजन का दर्द कुछ कम हो सकता था, सत्ता के दलालों में भी नैतिकता बची रहती और भ्रष्ट राजनेताओं पर अंकुश लगता।"

उन्होंने कहा, "नेल्सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका को एकजुट रखा और नस्लीय आधार पर विभाजन नहीं होने दिया। महात्मा गांधी भी द्वि-राष्ट्र के सिद्धांत के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने में सक्षम होते।"

वहीं, ब्रज प्रांत राष्ट्रीय स्वयंसेव संघ के सदस्य अशोक कुलश्रेष्ठ ने कहा, "गांधीजी की हत्या से किसी को कोई लाभ नहीं मिला। यदि वह कुछ दिन तक और जिंदा रह जाते तो राजनीति का शुद्धिकरण हो गया होता। गांधीजी ने हमेशा प्रयोग किया और अपनी गलतियों से सीखा तथा उसमें सुधार किया।"
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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