अन्ना की 'टोपी के नीचे' क्या निकला...
Source: भास्कर नेटवर्क | Last Updated 16:04(07/02/12)
उत्तर प्रदेश के चुनाव से पहले तक अन्ना हज़ारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की काफ़ी चर्चा थी. उधर अन्ना की तबीयत ख़राब हुई और इधर ये मुद्दा सिर्फ़ मुद्दा बनकर रह गया.
वही लोग जो कुछ महीने पहले तक ‘मैं हूँ अन्ना’ के नाम की टोपियाँ लगाए घूमते थे, आजकल अपने राजनीतिक दलों की टोपियों में हैं और दलों के बीच ये चुनाव एक बार फिर जाति-धर्म से प्रभावित दिख रहा है.
मैं पूरे प्रदेश का दावा तो नहीं कर सकता मगर सीतापुर से होते हुए बहराइच आने में जहाँ भी लोगों से बात हुई वे भ्रष्टाचार का मुद्दा तो उठाते हैं मगर प्रत्याशी चुनते समय जातीय या सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से बच नहीं पा रहे हैं.
तीन देवियाँ
राजनीति में महिलाओं के लिए राह आसान नहीं होती मगर बहराइच ज़िले की बलहा (सुरक्षित) सीट पर चार में से तीन प्रमुख पार्टियों ने महिलाओं को चुनावी जंग में उतार दिया है.
इन तीन में से दो ख़ुद को इलाक़े की बहू और एक बेटी बताकर लोगों से अपने पक्ष में मतदान करने को कह रही हैं. समाजवादी पार्टी के शब्बीर अहमद इस बार बलहा सीट से उम्मीदवार हैं यानी उनका मुक़ाबला ‘तीन देवियों’ से हो रहा है.
बहराइच के सांसद कमल किशोर की पत्नी पूनम किशोर को कांग्रेस ने टिकट दिया है और वो ख़ुद को इलाक़े की बहू कह रही हैं. बहुजन समाज पार्टी ने किरन भारती को टिकट दिया है. डॉक्टर शौकत अली की पत्नी किरन भी ख़ुद को इलाक़े की बहू बता रही हैं.
इन दोनों के साथ भारतीय जनता पार्टी ने सावित्रीबाई फुले को टिकट दिया है. फुले ज़िला पंचायत सदस्या हैं. भगवा कपड़े पहने फुले और अन्य दोनों महिला प्रत्याशियों का ज़ोरदार प्रचार रहा जहाँ उन्होंने लोगों के साथ आत्मीयता से बात करके व्यक्तिगत छाप छोड़ने की कोशिश की है.
अब जनता को किसका भाव पसंद आया ये तो वो आठ फ़रवरी को ही बताएगी.
फ़िल्मी सेट जैसी रैलियाँ
सीतापुर से बहराइच जाते समय रास्ते में मैं बलहा जाकर इन तीनों महिला प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार देखना चाह रहा था.
रास्ता ठीक से पता नहीं था इसलिए हम बहराइच में नानपारा से भी आगे बढ़ गए. वहाँ जाकर पता किया तो जाना कि हम काफ़ी आगे आ गए थे और बलहा का इलाक़ा सड़क से अंदर की ओर जाकर था.
सीतापुर से नानपारा जाते समय वहाँ बाज़ार के बीच बने एक पार्क में देखा कांग्रेसी नेता ज़ोरदार भाषण दे रहे हैं हर तरफ़ कांग्रेस के झंडे दिख रहे हैं.
ख़ैर हम आगे बढ़ गए. मगर जब रास्ता भूलने के बाद सही रास्ते तक पहुँचने वापस लौटे तो देखा नानपारा के उस बाज़ार में नीले झंडे लग चुके थे और उसी मंच पर बसपाई मौजूद थे.
सब कुछ लगा जैसे फ़िल्मी सेट की तरह बदल गया हो. अचानक एक सेट हटाकर दूसरा सेट लगा दिया गया हो.
साभार-बीबीसी।