वाराणसी. उस शाम भी हर रोज़ की तरह घंटे घड़ियाल की ध्वनि के साथ मोक्षदायिनी गंगा की आरती चल ही रही थी कि अचानक एक धमाके ने सब कुछ बदल दिया। मोक्ष भूमि वाराणसी के विश्व प्रसिद्द शीतला घाट पर सात दिसंबर 2010 को गंगा आरती के दौरान हुए बम धमाके ने नन्ही परी स्वास्तिका को उसके पहले जन्मदिन से 11 दिन पहले ही हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया।
उसमें घायल हुई मध्य प्रदेश की एक अधेड़ महिला (जो वाराणसी में संस्कृत शिक्षा अर्जित कर रहे अपने बेटे के पास आयी थी) ने भी तीन दिन बाद बीएचयू अस्पताल के आईसीयू में अपना दम तोड़ दिया। अयोध्या विध्वंस की 18वीं बरसी से मात्र 24 घंटे बाद हुए इस ब्लास्ट में छ विदेशी पर्यटक समेत 20 लोग घायल हुए। आज घटना की दूसरी बरसी है, गंगा आरती अब भी निर्बाध रूप से रोज़ शाम होती है, पर दो साल बाद भी आज तक यह नहीं पता चल पाया की आखिर इस ब्लास्ट को किया किसने था।
इस किलर ब्लास्ट की दूसरी बरसी पर ऐसा ही लगता है की बम खुद गंगा किनारे चल कर आया, एक कंटेनर में छिप कर बैठ गया और फिर अचानक फट गया। ऐसा इसलिए की दो साल की गहन जांच के बावजूद आज तक इस निर्मम हत्याकांड को अंजाम देने वाले आरोपी हैं अज्ञात। इस घटना के सम्बन्ध वाराणसी पुलिस द्वारा विश्व की प्राचीनतम नगरी के दशाश्वमेध थाने में आई पी सी की विभिन्न धाराओं और 3/5 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमा संख्या 159/19 आज भी अज्ञात लोगों के खिलाफ ही दर्ज है।
यही नहीं अगर विश्वस्त सूत्रों की माने तो आज तक यह भी नहीं पता चल पाया इस ब्लास्ट में इस्तमाल हुआ विस्फोटक क्या था। तब से अब तक बहुत सी अटकलें लगी, RDX से अमोनियम नाईट्रेट तक और प्लास्टिक एक्सप्लोसिव से मेहंदी के महक वाला बम, लेकिन पक्का कुछ भी आज तक नहीं हो पाया। नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी से लेकर गुजरात के फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट एम एस दहिया तक ने ब्लास्ट स्थल से सैंपल इकट्ठा किये और वापस चले गए पर शायद ही आज तक कुछ सार्थक परिणाम सामने आये।
आज शाम शीतला घाट पर सालों से आरती करवाने वाले किशोरी रमण दुबे 'बाबू महाराज' के नेतृत्व में मारे गए दोनों लोगों की याद में श्रद्धांजली आरती की जायेगी, पर इन सब के बीच इसका जवाब कौन देगा की यूपी पुलिस की एटीएस या केन्द्रीय जांच एजेंसियां आज तक ये क्यों नहीं पता लगा सकी की आखिर इस ब्लास्ट को अंजाम देने वाले कौन थे। शायद बस इतना ही मालूम है की घटना के बाद पाकिस्तान की जमीन से संचालित हो रहे इन्डियन मुजाहिदीन ने इ-मेल के ज़रिये ब्लास्ट की जिम्मेदारी लेते है कहा था की वो 30 सितम्बर 2010 को अयोध्या विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का इन्तेकाम है। यह मेल नवी मुम्बई में एक WiFi इन्टरनेट कनेक्शन के जरिये भेजा गया था।