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बादल ने भगत और अश्विनी को घर पर किया तलब

Bhaskar news | Sep 15, 2012, 05:32AM IST
 
 

चंडीगढ़। एनआरआई कोटे की मेडिकल सीटों को भरने के लिए प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को इजाजत देने के मामले में मेडिकल एजुकेशन विभाग की ओर से अपनाए गए रवैये से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल बेहद खफा हैं। इस मामले को लेकर उन्होंने जहां भाजपा अध्यक्ष अश्विनी शर्मा, मेडिकल एजुकेशन मंत्री चुनी लाल भगत को तलब किया, वहीं विभाग की सचिव अंजलि भावड़ा को भी स्थिति स्पष्ट करने के लिए अपने आवास पर बुलाया। खरीफ की फसल को लेकर बुलाई गई मीटिंग में जाने से पहले मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं को अपने आवास पर बुलाया और कहा कि प्राइवेट कॉलेजों को सीटें देने के मामले में भाजपा ने जो रवैया अपनाया है, वह सही नहीं है। वे इस मामले में सख्ती बरतेंगे।


विभाग के मंत्री चुनी लाल ने मुख्यमंत्री को स्पष्ट करने की कोशिश की कि उन्होंने जो भी किया वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले की रोशनी में ही किया है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा, सीटें बेचने जैसे आरोपों का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि एनआरआई कोटे की खाली सीटें भी पीएमईटी में मैरिट के आधार पर भरी जानी हैं।



सूत्रों का कहना है कि इस मामले के पूरे दस्तावेज भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने तलब किए हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘मुझे लगता है कि विभाग ने वही किया है, जो सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। मैंने अभी सारे दस्तावेज नहीं देखे हैं।’


उधर, भाजपा अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने कहा, ‘मैं तो निजी काम से सीएम से मिलने गया था। मेडिकल सीटों को कॉलेजों को देने के मामले में पार्टी का स्टैंड स्पष्ट है कि हर चीज पारदर्शी ढंग से होनी चाहिए।’

यह है विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की याचिका पर आदेश दिया कि एनआरआई कोटे की खाली सीटें वे अपने तौर पर भर सकते हैं। पंजाब मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग के मंत्री चुनी लाल भगत द्वारा जारी आदेश का अर्थ यह निकाला गया कि इससे प्राइवेट कॉलेजों को सीटें बेचने की छूट है। मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सभी सीटें मैरिट पर ही भरी जाएं। भगत ने इस ऑर्डर के तीन बिंदुओं पर आपत्ति जताई। इसकी जानकारी विभागीय सचिव के माध्यम से मुख्य सचिव ने बादल को दी। उसके बाद यह बैठक बुलाई गई।

अंदरूनी खींचतान तो नहीं?

जानकार सूत्रों का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों की एनआरआई सीटों को लेकर सरकार प्राइवेट कॉलेजों के दबाव में दिख रही थी। आरोप ये भी हैं कि मंत्री चुनी लाल भगत से उन भाजपा नेताओं ने काम करवाया है, जो अब सरकार में नहीं हैं। मुख्यमंत्री इसी बात से नाराज बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री को पूरा अंदेशा था कि मंत्री ने यह फैसला पार्टी के कुछ नेताओं के दबाव में लिया है। ये नेता मेडिकल कॉलेज संचालकों के नजदीकी बताए जाते हैं।

55 लाख रु. फीस है एनआरआई कोटे में
राज्य के निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे में एक सीट के लिए एक लाख डॉलर (करीब ५५ लाख रुपए ) फीस देनी पड़ती है।


बड़ी रकम की वजह से लग रहे आरोप
कॉलेजों को अपने स्तर पर सीटें भरने की छूट देने के फैसले के कारण आरोप लगने शुरू हो गए कि कॉलेज सीटें बेचकर पैसे कमाएंगे


अब फर्जीवाडे की आशंका नहीं
पीएमटी मैरिट के हिसाब से सीटें आवंटित होने के कारण सही कैंडिडेट को ही एडमिशन मिल सकेगा। फर्जीवाड़े की आशंका न के बराबर है।
 
 
 

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