चंडीगढ़। इन साड़ियों पर महाभारत छपा है। उस काल के प्रसंगों को दर्शाते चित्रों वाली साड़ियों की यह प्रदर्शनी सेक्टर-३४ स्थित प्रदर्शनी मैदान में लगी है। राष्ट्रीय खादी प्रदर्शनी में बंगाल से आए हरि प्रजापति कला और इतिहास को संजोए ऐसे वस्त्र लेकर आए हैं।
सिल्क की ऐसी एक साड़ी तैयार करने में लगभग तीन महीने का समय लग जाता है। प्रदर्शनी में पश्मीना ऊन से बनी शॉल भी उपलब्ध है, जोकि इतनी फाइन है कि एक छोटी सी अंगूठी में से पूरी गुजर जाती है।
हरि प्रजापति ने बताया कि शुद्ध सिल्क की एक साड़ी पर महाभारत से संबंधित सैकड़ों चित्र बुनकरों ने तैयार किए हैं। ऐसी एक साड़ी की कीमत है 7200 रुपए। यहां शांति निकेतन में तैयार की गई प्रिंटेड सिल्क की साड़ियां भी 1600 रुपए से लेकर 6800 रुपए में उपलब्ध हैं।
बंगाल का बेहतरीन मलमल और मटका सिल्क भी काफी आकर्षक है। हिमाचल खादी मंडल कुल्लु से आए कश्मीर सिंह प्रदर्शनी में पश्मीना ऊन से बने शॉल लेकर आए हैं।
पश्मीना की एक शॉल की कीमत ५ हजार रुपए है, जबकि वजन महज 250 ग्राम। इसके साथ-साथ यहां हर प्रकार की लेडीज शॉल, कुल्लु की हिमाचली टोपियां और अन्य गर्म कपड़ों की भी वेरायटी रखी गई है। यह प्रदर्शनी 3 मार्च तक जारी रहेगी।