नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले दस सालों में दिल्ली जल बोर्ड में 10 हजार करोड़ का घोयाला हुआ है और यह सभी धन उपभोक्ताओं के बिलों के माध्यम से चुकाये गए है।
उन्होंने कहा कि गैर राजस्व के नाम पर दिल्ली सरकार दिल्ली की जलापूर्ति विदेशी कंपनियों के हाथों इतना विरोध के बावजूद दे रही है और नांगलोई और मालवीय नगर जैसे प्रोजेक्ट आने वाले सालों में पूरी दिल्ली में लगाने की योजना बना रही है।
केजरीवाल ने जलबोर्ड के इन तमाम योजनाओं को संदेहास्पद बताते हुए सीएजी ऑडिट की मांग की और कहा कि प्रस्तावित दस प्रतिशत कीमत की वार्षिक वृद्धि की अनुमति के कानून को भी वापिस लिया जाना चाहिए।
उन्होंने पानी के बिलों के आकाश छूते दाम की वजह भी जल बोर्ड की लापरवाही को बताया। उन्होंने बताया कि 2004 में किसी भी मिडिल क्लास फैमिली के यहां पानी का बिल हर महीने 74 रुपये था। लेकिन आज यह कीमत अठारह गुना बढकर 1355 रुपए हो गई है।
यह रिकार्ड दिल्ली जल बोर्ड में बड़े करप्शन की तरफ इशारा करती है। उन्होंने कहा कि जल बोर्ड के रिकार्ड के अनुसार दिल्ली में अनुमानत: 840एमजीडी पानी अलग अलग स्रोतों से उपलब्ध है, जिसमें 50 प्रतिशत जल बर्बाद हो जाने की वजह से बोर्ड राजस्व नहीं वसूल पाती।
इसमें भी आधा पानी पाइप लीकेज की वजह से बर्बाद हो जाते है। अर्थात प्रतिदिन करीब 210 एमजीडी पानी लीकेज होने से राजस्व नहीं दे पाते। उन्होंने कहा कि यदि इन बर्बाद होते पानी को रोज दिल्ली की सड़कों पर बहा दिया जाए तो दिल्ली में बाढ़ आ जाए।