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ऐंठ लिए 50 करोड़ और 80 हजार छात्रों का भविष्य डाल दिया खतरे में!

Bhaskar News | Feb 23, 2013, 03:51AM IST
ऐंठ लिए 50 करोड़ और 80 हजार छात्रों का भविष्य डाल दिया खतरे में!

नई दिल्ली. पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी (पीटीयू) पर करीब 80 हजार छात्रों से फर्जीवाड़ा कर उन्हें अवैध तरीके से विभिन्न कोर्सों में एडमिशन देने के आरोप लगे हैं।


आरोप है कि नियम और कानून को ताक पर रखते हुए एडमिशन के लिए पीटीयू ने अपनी अधिकृत वेबसाइट पर नोटिस जारी किया और इसकी मदद से करीब 50 करोड़ रुपए जुटाए। अवैध डिग्री के चलते अब इन छात्रों का भविष्य अधर में अटक गया है।


तीस हजारी अदालत के आदेशानुसार दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र रचना व विश्वासघात करना आदि धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने जनवरी के अंतिम सप्ताह में दिए अपने आदेश में पीटीयू पर नए कोर्स के लिए छात्रों से आवेदन मांगने पर रोक लगाते हुए कहा था कि डिस्टेंस एजुकेशन काउंसिल (डीईसी) की अनुमति के बिना पीटीयू आगे किसी कोर्स के लिए छात्रों से आवेदन नहीं मांग सकती।


बुराड़ी निवासी विनय कुमार की शिकायत पर तीस हजारी अदालत के आदेश के बाद क्राइम ब्रांच ने पीटीयू के सात अधिकारियों डॉ. रजनीश अरोड़ा, एचएस बेन देवेंद्र सिंह, एसएस आहलूवालिया, सौरभ शर्मा, एसके मिश्रा और आदित्य जैन पर मुकदमा दर्ज किया है।


एक अधिकारी ने बताया कि कानून के मुताबिक किसी राज्य के विश्वविद्यालय को अपने राज्य से बाहर विभिन्न कोर्सों के लिए छात्रों से आवेदन मांगने से पहले केंद्र सरकार की डीईसी से पूर्व में अनुमति लेनी जरूरी होती है, लेकिन पीटीयू ने ऐसा करना जरूरी नहीं समझा।


ऐसा न करने पर विश्वविद्यालय द्वारा दी गई डिग्री के आधार पर कोई भी छात्र किसी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकता। पीटीयू पर आरोप है कि उसने अकेले दिल्ली में ही 70 से 80 हजार छात्रों को इन गैर अधिकृत कोर्सों में एडमिशन दिया और इससे छात्रों से कुल 50 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा किया।


विनय का आरोप है कि अगर डीईसी व अन्य सरकारी मशीनरी ने समय रहते पीटीयू के खिलाफ कार्रवाई की होती तो इतनी संख्या में छात्रों का भविष्य अधर में लटकने से बच सकता था।


अपनी शिकायत में विनय ने आगे बताया कि 13 जनवरी 2013 को 'सी एंड एफ' नामक एक नए कोर्स के लिए मांगे गए आवेदन में पीटीयू एक बार फिर नियम और कानून को धत्ता बता रही है।


ठगे जाने का पता चलने पर जब विनय ने पीटीयू से अपनी रकम लौटाने की बात कही तो विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से उसे साफ इंकार कर दिया। रकम न लौटाने पर विनय ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच का दरवाजा खटखटाया, लेकिन शिकायत मिलने के लंबे समय बाद तक भी जब उसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अंतत: वह अदालत की शरण में गया।इसके बाद पुलिस भी हरकत में आई और पीटीयू के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

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