नई दिल्ली. अकेलेपन और दहशत के बीच जिंदगी से जूझ रहीं अनुराधा न तो बेटी की मौत को भूल पा रही थीं और न ही इंसाफ की उम्मीद थी। उस पर गोपाल कांडा की पहुंच ने बाकी बची हिम्मत को तोड़ कर रख दिया था।
मीडिया में आई खबर ने भले ही आरोपी गोपाल कांडा को जेल पहुंचा दिया लेकिन न्याय प्रक्रिया की सुस्त चाल से वह हार गईं और मौत को गले लगाने से पहले इतना कहा कि घुट-घुट कर मरने से अच्छा है कि आज ही मर जाऊं..।
दो पन्नों के सुसाइड नोट में अनुराधा ने लिखा है कि सारा दिन वह घर पर अकेली बैठ कर बेटी की यादों में ही खोई रहती थीं। 24 घंटे बेटी की तस्वीर उनकी आंखों के सामने घूमती रहती थी।
उन्हें धीमी न्यायिक प्रक्रिया के चलते एक तरफ बेटी को अब तक इंसाफ न दिला पाने का मलाल था तो दूसरी ओर गोपाल कांडा जैसे प्रभावशाली व्यक्ति की पहुंच के चलते अब उन्होंने इंसाफ की आस खो दी।