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आज होगा दामिनी के दोषियों पर फैसला : फांसी देने के हक में है 16 दिसंबर क्रांति ग्रुप

Bhaskar News | Sep 10, 2013, 05:54AM IST
आज होगा दामिनी के दोषियों पर फैसला : फांसी देने के हक में है 16 दिसंबर क्रांति ग्रुप

नई दिल्ली. वसंत विहार गैंगरेप मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना की अदालत मंगलवार को अपना फैसला सुनाएगी। लोगों में आरोपियों के प्रति जबर्दस्त रोष है और वे अदालत से फांसी की मांग कर रहे हैं। 16 दिसंबर क्रांति ग्रुप निर्भया को इंसाफ दिलाने और ऐसी घिनौनी हरकत आगे न हो, इसको रोकने की मांग को लेकर 24 दिसंबर, 2012 से जंतर-मंतर पर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहा है।


ग्रुप से जुड़े सदस्यों का कहना है कि 16 दिसंबर क्रांति हमें निर्भया के साथ हुई दरिंदगी की उस भयानक रात को याद दिलाती है। हम चाहते हैं कि इस केस के सभी दोषियों को फांसी की सजा हो। गु्रप से जुड़ी डीयू की छात्रा पीहू का कहना है कि आरोपियों को फांसी की सजा होनी चाहिए। उनका कहना है कि आज भी जब वह अपने घर से निकलती हैं तो उन्हें यह डर हमेशा सताता रहता है कि वह सकुशल घर पहुंचेंगी या नहीं। वह कहती हैं कि आज भी दिल्ली में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं।


दामिनी के साथ हुए घिनौने अपराध के बाद प्रतिदिन अखबारों में एक या दो खबरें दुष्कर्म से संबंधित होती हैं। ऐसे में हमारे माता-पिता भी हमें घर से बाहर निकलने की इजाजत देने में डरते हैं। एक अन्य सदस्य विकास का कहना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट सभी स्तरों पर गठित हों ताकि लंबित मामलों का तीन महीने में और नए मामलों का छह महीने में निपटारा हो सकें। उन्होंने कहा कि आरोपियों को जब तक फांसी नहीं होती हम जंतर-मंतर पर ही डटे रहेंगे।


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पैरामेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को फांसी की सजा देने के लिए सरकार को कानून बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दअरसल, सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़िता की मौत के बाद दिल्ली पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया था, जिसके तहत अधिकतम फांसी की सजा का प्रावधान है।
 
दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (कानून-व्यवस्था) धर्मेंद्र कुमार ने इसकी पुष्टि की थी। अभी तक इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 201 (सबूत मिटाने का प्रयास), 365 (अपहरण), 376-2-जी (सामूहिक दुष्कर्म), 377 अप्राकृतिक अपराध, 394 (लूटपाट के दौरान मारपीट) और 34 (समान उद्देश्य) का मामला दर्ज किया गया था। 
 
स्पेशल कमिश्नर धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि पीड़िता की अटॉप्सी सिंगापुर अस्पताल में की गई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में दिन-प्रतिदिन होने वाली सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष रखने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील ध्यानकृष्णनन इस केस में विशेष लोक अभियोजक थे। ध्यानकृष्णनन ने स्वेच्छा से नि:शुल्क इस केस में पैरवी करने की इच्छा जताई थी। उन्हें उनके दो कनिष्ठ सहयोगी इस केस में मदद की।
 
उल्लेखनीय है कि सभी छह आरोपियों राम सिंह, उसके भाई मुकेश, अक्षय सिंह, पवन, विनय सहित एक नाबालिग को दिल्ली पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है, जिसमें से एक की मौत हो चुकी है। नाबालिग के अतिरिक्त सभी आरोपी इस समय तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।
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