जोधपुर। यह है मेहरानगढ़ का किला। जोधपुर शहर के ठीक बीचोंबीच। करीब 125 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह किला भारत के समृद्धशाली अतीत का प्रतीक है। 15वीं शताब्दी में राव जोधा ने इस किले की नींव रखी, लेकिन महाराज जसवंत सिंह ने इसे पूरा किया। इस किले के मुख्य चार द्वार हैं। वैसे किले के सात द्वार (पोल) हैं, जबकि आठवां द्वार गुप्त है। अनगिनत बुर्ज हैं।किला दस किलोमीटर लंबी ऊंची दीवार से घिरा है। यह किला बाहर से अदृश्य, घुमावदार सड़कों से जुड़ा है।
किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार दरवाजा और जालीदार खिड़कियां हैं। खासतौर पर मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना, दौलत खाना की एक अलग ही पहचान है। इन महलों में भारतीय राजवंशों के साजो- सामान का विस्मयकारी संग्रह है। इसके अलावा पालकियां, हाथियों के हौदे, विभिन्न शैलियों के लघु चित्रों, संगीत वाद्य, पोशाकों व फर्नीचर का अद्भुत संग्रह भी है।
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