जयपुर। राजस्थान का इतिहास जितना वैभवपूर्ण, उतना ही गौरवशाली। यहां के राजाओं ने अपनी रियासत के लिए जान की परवाह तक नहीं की। "भरतपुर का ऐतिहासिक किला" अजेय होने के कारण "लौहगढ़" कहलाता है। सदियों से चली आ रही परंपरा को बरकरार रखने के लिए यहां के राजाओं ने मातृभूमि की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी है। राजाओं ने अपनी शान-ओ-शौकत के लिए सब कुछ न्यौछावर कर दिया। ऐसी ही एक रियासत है भरतपुर। इसे राजस्थान का पूर्व सिंहद्वार भी कहा जाता है। यहीं स्थित है यह अजेय दुर्ग। जो फौलादी दृढ़ता के साथ लोहागढ़ के नाम से इतिहास में दर्ज है। जिसपर 13 युद्धों के दौरान दागे गए गोलों का भी कोई असर नहीं हुआ था। यहां जाट राजाओं की हुकूमत थी। जो अपनी दृढ़ता के लिए जाने जाते हैं।
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