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सांपों की जिंदगी बचा रहा यह नेकदिल पुलिसवाला

rakesh malviya | Dec 03, 2012, 10:46AM IST

रायपुर-महासमुंद। आमतौर पर हम सांप देखते ही घबरा जाते हैं और अधिकांश मौकों पर उसे मार भी डालते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ पुलिस का हेड कांस्टेबल विकास शर्मा उन्हें जीवन देता है। विलुप्त हो रही प्रजातियों के साढ़े चार हजार से भी अधिक सांपों को उन्होंने बचाया है। लोगों को सांपों की पहचान कराने के लिए ३२ वर्षीय यह युवक १४ सालों से सांप को बचाओ अभियान भी छेड़ा हुआ है। लेकिन यह इतना आसान नहीं है, इसके लिए वह जो काम करते हैं उसे जानकर आप भी चौंक जाएंगे।


स्टोरी फोटो : नीरज गजेन्द्र


विकास यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि सभी सांप जहरीले नहीं होते। भ्रांति और अंधविश्वास के कारण लोग सांपों को दुश्मन समझ बैठे हैं, जबकि वह पर्यावरण के रक्षक होते हैं। विकास के अनुसार जितनी मौतें सांपों के डसने से नहीं होती, उससे ज्यादा अंधविश्वास और भय के कारण हो रही है। इस कारण वह लोगों को यह बताने में लगे हैं कि सांपों की कौन सी प्रजाति जहरीली होती है और कौन सी नहीं।
खुद को डसवा कर कराते हैं पहचान: आमलोगों में जागृति आए, इसके लिए विकास कई बार सांप से खुद को डसवा भी लेते हैं। रिहायशी इलाकों में पहुंच रहे सांपों को पकडऩे के बाद विकास उसकी सेहत का भी ख्याल रखते हैं। जख्मों का इलाज करने के उन्हें वे जंगल में छोड़ आते हैं।

१५ साल की उम्र में मिली प्रेरणा: विकास जब कक्षा ८वीं के छात्र थे, तभी उन्होंने एक सांप को पकड़ लिया। सांप ने डसा भी, पर उन्हें कुछ नहीं हुआ। तभी से सांपों के प्रति विकास की दिलचस्पी बढ़ी। बेवजह सांपों को मारने की घटनाओं ने उन्हें लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया।

इसलिए रिहायशी क्षेत्रों में आ जाते हैं सांप: विकास के अनुसार रासायनिक खादों के अधिक इस्तेमाल से मिट्टी के साथ ही वायुमंडल भी प्रभावित हो रहा है। इसलिए सांपों को जहां स्वच्छ वातावरण मिलता है, वे उधर ही पहुंच जाते हैं। रिहायशी क्षेत्रों की ठंड सांपों को शीतलता का अहसास कराती है।



ये होते हैं जहरीले: विकास ने बताया कि कामन करैत, स्पेटिकल कोबरा, रसैलस वाइपर और बैंडेड करैत अधिक जहरीले सांपों की श्रेणी में आते हैं।



इनका असर नहीं: रैट स्नैक, स्ट्राइब्ड कीलबैक, ट्रिंकैट स्नैक, कैट स्नैक, चैकर्ड कीलबैक, वाटर स्नैक, कुकरी स्नैक, कामन सैंडबोआ, राकपाइथन के डसने से कोई नुकसान नहीं होता।
 

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