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कवर्धा के क्लिनिक से सीएम हाउस तक रमन सिंह

rakesh malviya | Dec 06, 2012, 17:07PM IST

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. रमन सिंह सात दिसम्बर को अपने कार्यकाल के नौ वर्ष पूरे कर दसवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। डॉ. सिंह इस अवधि में इसी महीने की 12 तारीख को अपने द्वितीय कार्यकाल के चार साल पूरे कर पांचवें वर्ष में प्रवेश करेंगे। गांव, गरीब और किसानों की बेहतरी तथा समाज के सभी वर्गों की तरक्की और खुशहाली के लिए विगत नौ वर्षों में डॉ. सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं को मिली सफलता ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलायी है। रमन सरकार के ये नौ साल छत्तीसगढ़ के नव-निर्माण के नौ साल के रूप में देखे जा रहे हैं।
जानिये क्यों
भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने पिछले महीने की छह तारीख को नया रायपुर में आयोजित राज्योत्सव अलंकरण समारोह में छत्तीसगढ़ को देश का सबसे तेज गतिमान राज्य बताया। साक्षरता, शिक्षा, कृषि, सिंचाई, बिजली, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य आदि हर क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने डॉ.रमन सिंह के नेतृत्व में सफलता का परचम लहराकर वास्तव में तेज गतिमान राज्य होने का प्रमाण दिया है।

पेशे से आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. सिंह ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रथम आम चुनाव में मिले ऐतिहासिक जनादेश के साथ नये राज्य की पहली निर्वाचित सरकार के मुखिया के रूप में सात दिसम्बर 2003 की सुबह राजधानी रायपुर के पुलिस परेड मैदान में हजारों नागरिकों की उपस्थिति में शपथ ग्रहण कर राज्य की विकास यात्रा की कमान संभाली थी।

छत्तीसगढ़ विधानसभा का दूसरा आम चुनाव 14 नवम्बर 2008 और 20 नवम्बर 2008 को हुआ। इसकी मतगणना आठ दिसम्बर 2008 को हुई, जिसमें डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा को दोबारा जनादेश मिला। 12 दिसम्बर 2008 को आम जनता की उपस्थिति में उसी पुलिस परेड मैदान में वह एक बार फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

डॉक्टर रमन सिंह ने शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय से वर्ष 1975 में बी.ए.एम.एस. की उपाधि हासिल कर कवर्धा के एक गरीब मोहल्ले में डॉक्टर के रूप में जनसेवा की शुरुआत की थी। डॉक्टर होने के नाते मरीजों की नब्ज की जितनी गहरी समझ उनमें हैं, उतनी ही गहराई से वह जनता की भावनाओं और लोगों के दिल की धड़कनों को भी महसूस कर लेते हैं।

छग की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में लाखों गरीबों तक सुव्यवस्थित रूप से सस्ते अनाज की नियमित आपूर्ति ने योजना आयोग और केन्द्र सरकार के अनेक मंत्रियों सहित देश के कई राज्यों का ध्यान आकर्षित किया है। यहां तक कि योजना आयोग ने तो कुछ समय पहले अपनी एक बैठक में छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अन्य राज्यों में मॉडल के रूप में अपनाने की सलाह दी थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने भी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कहा था कि जब छत्तीसगढ़ इस प्रणाली को इतने सुचारु रूप से संचालित कर सकता है, तो देश के अन्य राज्य भी ऐसी ही व्यवस्था क्यों नहीं अपनाते ?

रमन सरकार ने वर्ष 2007 से 2012 के बीच ग्यारह नये जिलों का गठन कर प्रदेश के पिछड़े इलाकों में शासन-प्रशासन को जनता के नजदीक पहुंचाने में सफलता हासिल की है। नये जिलों के गठन से वहां प्रशासनिक गतिविधियों के साथ विकास प्रक्रिया भी तेज हो गई है।

कुछ खास बातें: किसानों की कर्ज मुक्ति, कृषि ऋणों पर ब्याज दर को लगातार कम करते हुए मात्र एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण सुविधा दिलाना, छत्तीसगढ़ को देश के प्रथम और इकलौते विद्युत कटौती मुक्त राज्य की श्रेणी में लाना, 34 लाख गरीब परिवारों के लिए मात्र एक रुपये और दो रुपये किलो में हर महीने 35 किलो अनाज की व्यवस्था, नि:शुल्क दो किलो आयोडिन नमक वितरण, हाई स्कूल स्तर की बालिकाओं को नि:शुल्क साइकिल, किसानों के लिए अलग कृषि बजट, आदिवासी क्षेत्रों के त्वरित और समग्र विकास के लिए बस्तर और सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण, अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों के लिए अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण और सामान्य विकासखंडों के लिए ग्रामीण विकास प्राधिकरण का गठन, राज्य में आठ नये विश्वविद्यालयों की स्थापना, राज्य सरकार ने आज 95 आदिवासी बहुल विकासखंडों में 13 लाख परिवारों और 16 लाख 50 हजार स्कूली बच्चों को अंधेरे से बचाव के लिए नि:शुल्क सोलर लालटेन देने की योजना शुरू करने का निर्णय लिया है। महिलाओं के उत्थान के लिए पंचायतराज संस्थाओं में उनका आरक्षण 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है।

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