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फिल्मी स्टाइल में खोला कार का दरवाजा और दबोच लिया खुशी को

rakesh malviya | Dec 08, 2012, 10:50AM IST

रायपुर। तेलीबांधा श्यामनगर में रहने वाले इलेक्ट्रिक सामान के कारोबारी और प्रॉपर्टी डीलर दीपक कुकरेजा की बेटी खुशी का अपहरण पूरी प्लानिंग के साथ किया गया। पिछले दो दिनों से एक मोटरसाइकिल खुशी की स्कूल बस का पीछा कर रही थी। अपहरणकर्ता शुक्रवार शाम पौने पांच बजे तेजी से आए और पलक झपकते ही खुशी को कार में ठूंसकर ले भागे, इससे यह आशंका है कि किडनैपर पेशेवर हैं। उन्होंने अपहरण करने के पहले तगड़ी प्लानिंग की थी। गिरोह द्वारा रेकी की संभावना से भी पुलिस इनकार नहीं कर रही।
अपहरणकर्ताओं ने वारदात के बाद भागने का रास्ता भी पहले से तय कर लिया था। इस वजह से उन्होंने छात्रा को तेलीबांधा चौक के पास किडनैप नहीं किया, जबकि छात्रा स्कूल की बस से उतरने के बाद रोज लगभग आधा किलोमीटर पैदल चलकर अपने घर जाती है। उसका घर गली नंबर-६ में है। स्कूल की बड़ी बस के लिए वहां तक जाना संभव नहीं है। पुलिस अफसरों के मुताबिक अपहरणकर्ताओं को रेकी के दौरान यह आभास हुआ कि उनके लिए छात्रा के घर के सामने से भागना ज्यादा आसान रहेगा। भीड़ भरी रोड में हल्ला होने पर वे ट्रैफिक में फंसकर पकड़े जा सकते हैं। इसी अंदेशे के चलते उन्होंने छात्रा को स्कूल बस से उतरकर घर तक जाने दिया। इस दौरान वे कार से लगातार उसका पीछा करते रहे। खुशी जैसे ही घर के पास पहुंची, किडनैपरों ने अपनी योजना को अंजाम दे दिया।




खुशी एनएच गोयल स्कूल के लिए बस में सुबह तेलीबांधा चौक से सवार होती और शाम को वहीं उतरती है। रोज की तरह शुक्रवार की शाम बस के ड्राइवर दुकालूराम साहू ने खुशी को तेलीबांधा चौक पर उतारा। छात्रा का घर वहां से लगभग आधा किलोमीटर है। भीड़ भरे चौराहे पर उतरने के बाद छात्रा पैदल घर की ओर चल पड़ी। चौराहे से वह श्यामनगर गुरुद्वारे जाने वाली रोड पर आगे बढ़ी। तेलीबांधा चौक से लगभग ५०० मीटर पैदल चलने के बाद वह बाएं हाथ की ओर जाने वाले बाइपास सड़क पर मुड़ गई। इस रोड पर लगभग २०० मीटर चलने के बाद राइट हैंड में उसका घर है। छात्रा दोनों रास्तों को पार करते हुए घर के सामने पहुंची।
कुकरेजा परिवार पर जैसे गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। खुशी तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी है। वह पढ़ाई में तेज है। दीपक कुकरेजा ने इसी वजह से अपनी बिटिया को बड़े स्कूल में दाखिला दिलवाया है। माता-पिता को उसे लेकर बड़ी उम्मीदें हैं। खुशी का अपहरण जिस समय हुआ उस दौरान घर पर मां के अलावा अन्य सदस्य उपस्थित थे। वे मकान के एक हिस्से में स्थित बगीचे में कुछ पूजा-अर्चना कर रहे थे। खुशी को जिस समय अपहरणकर्ताओं ने गाड़ी में ठूंसा, उसने मदद के लिए पुकार लगाई। रोड पर मौजूद बच्चों ने भी शोर मचाना शुरू किया। आवाज सुनकर खुशी की मां और परिवार के बाकी लोग कौतूहलवश बाहर आए। हालात की जानकारी होने पर खुशी की मां कुछ देर के लिए बदहवास जैसी हो गई।
उन्होंने जोर-जोर से बचाओ-बचाओ की आवाज लगाई, फिर बेसुध जैसी हो गई। परिवार में मौजूद दूसरे सदस्यों ने खुशी के पिता दीपक को उसी समय मोबाइल किया। वे उस समय रविभवन स्थित अपनी दुकान पर थे। फोन पर बच्ची के अपहरण की घटना सुनते ही वे अवाक रह गए। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी और आनन-फानन में घर पहुंचे। इस दौरान घर पर उनके रिश्तेदार और आस-पड़ोस में रहने वालों की भीड़ इक_ा हो चुकी थी। उन्होंने पत्नी और घर के दूसरे सदस्यों को हिम्मत रखने का दिलासा दिया। उसके बाद वे दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ सीधे तेलीबांधा थाने पहुंचे।
थाने में पुलिस को अपनी बिटिया के बारे में बताते-बताते उनके सब्र का बांध टूट गया। वे अपने साथियों के सीने से लगकर फूट-फूटकर रोने लगे। थाने में मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बड़ी मुश्किल से संभाला। कुकरेजा परिवार को सालों से जानने वाले लोगों का कहना है कि उनको विश्वास ही नहीं हो रहा कि इतने सीधे परिवार पर ऐसी मुसीबत आ सकती है।

खुशबू उर्फ खुशी कुकरेजा को पुलिस ने आठ घंटे में ही बरामद कर लिया। बच्ची के अपहरण होने की सूचना मिलते ही पुलिस ने शहर की नाकेबंदी करने के अलावा अपहरण में इस्तेमाल सफेद रंग की रिट्ज कार की तलाश शुरू कर दी थी। आशंका है कि तगड़ी घेरेबंदी की वजह से आरोपी शहर से बाहर नहीं निकल पाए।
क्राइम ब्रांच ने उनका एक साथी पकड़ लिया। पुलिस का दबाव इतना ज्यादा बढ़ा कि अपहरणकर्ता ११ साल की खुशी को पुरानी बस्ती के दूधाधारी मंदिर के सत्संग भवन से थोड़ी दूर सूनसान जगह पर छोड़कर भाग गए। किडनैपरों ने बच्ची की आंखों में पट्टी बांध दी थी। मंदिर के चौकीदारों ने उसे देखा और परिवार वालों को सूचित किया। एसएसपी दिपांशु काबरा ने बताया कि रात करीब डेढ़ बजे दूधाधारी सत्संग भवन के पास काम करने वाले चौकीदार को बच्ची के रोने की आवाज

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