बैंड बाजे से निकाली बारात तो नहीं आएंगे साहेबान !

रायपुर। मुस्लिम समाज ने फिजूलखर्ची और शरियत के खिलाफ होने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कवायद शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत बुजुर्गाने दीन के आस्तानों में पेश की जाने वाली चादरों में बैंड बाजे पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाकर की जा रही है। यानी अब किसी भी बुजुर्ग के उर्सपाक के दौरान बैंड बाजे के साथ चादर निकालने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
रविवार को मुस्लिम हॉल में समाज के प्रबुद्धजनों की बैठक हुई। शहर की तकरीबन सभी मस्जिद के पेश इमाम साहेबान इस बैठक में शामिल थे। उनकी मौजूदगी में मुतवल्ली, समाज सेवक, वकील और सीरतुन्नबी कमेटी के अध्यक्ष नौमान अकरम सहित अन्य लोगों ने फिजूलखर्ची और शरीयत के खिलाफ सार्वजनिक रुप से होने वाले प्रदर्शनों को बंद करने की अपील की।
बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार पूरी मुहिम चरणबद्ध तरीके से चलाई जाएगी। समाज के वरिष्ठ जनों को शहर के इलाके बांट दिए जाएंगे। उसके बाद वरिष्ठजन उन इलाकों में बैठक लेकर नौजवानों और समाज सेवा से जुड़े लोगों का समर्थन हासिल करेंगे। उसके बाद इस मुहिम को अमलीजामा पहनाया जाएगा। मुहिम के दूसरे चरण में शादियों में बैंड बाजा बंद करवाने की योजना है। लोगों को इसकी बुराई के बारे में समझाने के लिए इमाम साहेबान की मदद ली जाएगी।
मस्जिदों और मोहल्लों में तकरीरी प्रोग्राम आयोजित करने की योजना है। शादी में बैंड और डीजे प्रतिबंधित करने के लिए युवाओं को भी विश्वास में लिया जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि कोई परिवार बिलकुल ही जिद पर अड़ जाए तो निकाह पढ़ाने के लिए कोई नहीं जाएगा। इसके लिए भी इमाम साहेबान ने सहमति दे दी। इस मुहिम को राजधानी में लागू करने के बाद राज्यभर में फैलाने की योजना है। शहरी और प्रदेश स्तर पर अलग-अलग कमेटियां भी बनाई जाएंगी।
बैठक में ये फैसले
0 बैठक में शामिल प्रबुद्ध जनों ने कहा कि बैंड बाजे वाली बारात होने पर वे विवाह में शिरकत नहीं करेंगे।
0 आने वाले दिनों में मस्जिदों में निकाह की रस्म अदा की जाए। इससे फिजूल खर्ची कम होगी
0 प्रत्येक मोहल्ला स्तर पर लोगों को समझाने के लिए कमेटी बनाई जाएगी।
0 मुहिम में नौजवानों को ज्यादा से ज्यादा जोडऩे का प्रयास किया जाएगा।








