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हाईप्रोफाइल किडनैपिंग की मिनट टू मिनट कहानी

rakesh malviya | Dec 11, 2012, 11:08AM IST

रायपुर। तेलीबांधा श्यामनगर से खुशी का सरेआम अपहरण कर सनसनी फैलाने वाले किडनैपरों को क्राइम ब्रांच की टीम ने बिलकुल फिल्मी अंदाज में दबोचा। किडनैपरों की पहचान होने के बाद क्राइम ब्रांच ने उनके परिवार वालों को घेरा। परिवार और दोस्तों से मिले क्लू के आधार पर ओडिशा की ओर तीन टीमें रवाना की गई। इन्हीं टीमों ने सोमवार की शाम सराईपाली के पास एक तिगड्डे में किडनैपरों की कार को घेर लिया।



जसविंदर सिंह उर्फ विक्की और प्रबदीप सिंह उर्फ लक्की की पहचान शुक्रवार को अपहरण होने के २४ घंटे के भीतर ही हो गई थी। शनिवार को पुलिस ने उनके सभी करीबियों का अपने घेरे में लिया। अलग-अलग स्तर पर की गई पूछताछ के बाद उनकी लोकेशन का पता चल गया। किडनैपरों के मोबाइल फोन हालांकि बंद थे, लेकिन घर से जाने के समय उन्होंने अपने करीबियों को बताया था कि ओडिशा की ओर जा रहे हैं। ओडिशा में कोमाखान, बरगड़ और संबलपुर में उनकी रिश्तेदारी है। पुलिस ने अपने जासूसों के जरिये पता लगवाया। किडनैपरों की सफेद रिट्ज कार उस रोड से गुजरने की पुष्टि हो गई। उसके बाद एसएसपी ने क्राइम ब्रांच के टीआई रमाकांत साहू, सब इंस्पेक्टर गौरव तिवारी और कलीम खान के नेतृत्व में तीन टीमें बनाई। तीनों टीमों को अलग-अलग टास्क दिए गए।



ऐसे चला पूरा ऑपरेशन



रविवार-सोमवार की रात किडनैपरों का लोकेशन मिलने के बाद सब इंस्पेक्टर कलीम खान और गौरव तिवारी की टीम को ओडिशा रवाना किया गया। खान की टीम सराईपाली की ओर से ओडिशा गई, जबकि तिवारी की टीम महासमुंद के रास्ते से रवाना हुई। मुखबिरों के साथ खान की टीम किशोर सेठ, जमीन खान और सरफराज चिश्ती ने बॉर्डर इलाके में तलाश शुरू की। तिवारी की टीम एएसआई, प्रेमराज बारिक, अनिल प्रधान, नवधाराम और अश्वनी के साथ बरगड़, कोमाखान की ओर रवाना हुई। ओडिशा बॉर्डर के पास खान की टीम ने किडनैपरों की रिट्ज को अपने सामने से गुजरते देखा। किडनैपरों की गाड़ी रायपुर की ओर आ रही थी। इस टीम ने तुरंत राजधानी में पूरे ऑपरेशन को आपरेट कर रही टीआई साहू की टीम को सूचना दी। उसके बाद शुरू हुआ किडनैपरों की गाड़ी का पीछा।
प्रोफेसर्स कॉलोनी के इसी मकान में आरोपियों ने खुशी को कुछ देर के लिए रखा था।
एमएमएस से भेजा फोटो: इन्वेस्टिगेशन में पुलिस ने हाईटेक तरीकों का जमकर उपयोग किया। सिटी एसपी डा. लाल उमेद सिंह ने अपने मोबाइल से बच्ची का फोटो लिया और एमएमएस के जरिए उसे राज्य के सभी पुलिस अधिकारियों व जवानों को भेज दिया। इतना ही नहीं महासमुंद, दुर्ग, बिलासपुर, धमतरी, गरियाबंद और बलौदाबाजार जिले तमाम थानेदारों को फोटो एसएमएस किए , ताकि बच्ची को पहचाना जा सके।
नंबर प्लेट उतारी, फिर लगा दिया : किडनैपिंग के दौरान पहचान से बचने के लिए आरोपियों ने कार की नंबर प्लेट सीजी ०४-एचबी ६९३७ उतार दी थी। वारदात के बाद घर पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले नंबर प्लेट लगाई। उसके बाद उसे हल्का से मोड़ दिया, ताकि एक नजर में नंबर न देखा जा सके। उसके बाद शहर से बाहर ओडिशा की ओर चले गए।
सुबह बनाया भागने का प्लान
अपहरण करने के बाद पुलिस की मुस्तैदी देख लक्की और विक्की के साथ-साथ सिद्धू को अहसास हो गया कि उनसे बड़ी गलती हो गई है। उन्होंने बच्ची को छोडऩे का प्लान बनाया। मोटरसाइकिल पर पुलिस की नाकेबंदी देखने के दौरान लक्की ने यह देखा था कि सत्संग भवन में किसी सिंधी परिवार का विवाह हो रहा है। उन्होंने यह सोचा कि सत्संग भवन के पास बच्ची को छोडऩे से वह आसानी से अपने परिवार तक पहुंच जाएगी। बच्ची को छोडऩे के बाद वे स्टेशन गए। रेलवे स्टेशन पर सिद्धू को छोड़कर दोनों मौसेरे भाई पूरी रात कार में इधर-उधर घूमते रहे। सिद्धू का उसके बाद से कोई सुराग नहीं है। सुबह समाचार पत्र देखकर दोनों ने शहर के भागने का निर्णय लिया। उन्हें यह भी अहसास हो गया कि उनके कुछ कागजात खुशी के बैग में रह गए हैं। उन के जरिये वे आसानी से पकड़े जाएंगे। इस वजह से भी उन्होंने भागने का फैसला किया।
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तीन महीने पहले कर ली थी पूरी प्लानिंग

विक्की और लक्की ने तीन माह पहले ही खुशी के अपहरण की योजना बना ली थी। अपने काम-काज के चक्कर में वह अक्सर दीपक कुकरेजा के घर के आस-पास आते थे। उनके कारोबार और घर को देखकर उन्हें लगा कि कुकरेजा परिवार से फिरौती वसूलना आसान रहेगा।
विक्की और लक्की अपनी योजना को अंजाम देना चाहते थे, लेकिन दिवाली की छुट्टी पड़ गई। छुट्टियों में स्कूल बंद थे। इस वजह वे अपहरण नहीं कर सके। हालांकि छुट्टियों के दौरान वे बेहद बेचैन रहे। उन्होंने कई बार नाम बदलकर स्कूल में फोन करके यह जानकारी ली कि कब तक स्कूल बंद रहेंगे। दिवाली की छुट्टियां खत्म होने के बाद जब खुशी फिर स्कूल जाने लगी, तब उन्हें अपनी

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