रायपुर। यह देश की सबसे पुरानी नाट्यशाला है। इसका गौरव इसलिए भी अधिक है क्योंकि कालीदास की विख्यात रचना मेघदूतम ने यहीं आकार लिया था। महाकवि कालीदास ने जब उज्जियनी का परित्याग किया था तो यहीं आकर उन्होंने साहित्य की रचना की थी। इसलिए ही इस जगह आज भी हर साल आषाढ़ के महीने में बादलों की पूजा की जाती है। देश में संभवत: यह अकेला स्थान है जहां कि बादलों की पूजा करने का रिवाज हर साल है। इस पूजा के दौरान देखने में आता है कि हर साल उस समय आसमान में काले-काले मेघ उमड़ आते हैं।
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फोटो: सबसे पुरानी रंगशाला का मुख्यद्वार।