वरिष्ठ कांग्रेस नेता शैलेष नितिन त्रिवेदी की इस बजट पर राय
बजट से समाज के सभी वर्गों को निराशा :
भाजपा सरकार द्वारा अपने दूसरे कार्यकाल के अंतिम बजट से समाज के सभी वर्गों को निराशा हुयी है। बजट में कोई मौलिकता नहीं है, राज्य के विकास की कोई सोच भी नहीं, विजन भी नहीं।
बजट में महिलाओं, किसानों, सरकारी कर्मचारियों, सहकारिता कर्मियों सहित किसी की उम्मीदें पूरी नहीं हुयी है।
भाजपा ने 2008 के घोषणा पत्र में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिये आर्थिक कार्यक्रमों, एक जिले में कामकाजी महिला वसति गृह की स्थापना, महिलाओं को गैस कनेक्शन में सब्सिडी और सरकारी खरीद में महिलाओं को प्राथमिकता जैसे वादे किये थे।
महिला विरोधी भाजपा सरकार ने इन वादों को पूरा करने के लिये
कुछ भी नहीं किया।
किसानों से धान पर 270 रू. बोनस का पूरा वादा निभाने की जगह सिर्फ एक साल की धान खरीदी पर बोनस देने का प्रावधान कर भाजपा सरकार ने किसानों को एक बार फिर से छला है।
भाजपा सरकार को कांग्रेस के द्वारा लगातार धान पर बोनस का वादा निभाने के लिये चलाये गये आंदोलनों के कारण एक साल का बोनस देने के लिये मजबूर होना पड़ा है।
भाजपा और रमनसिंह जी को बिजली बोनस और बेरोजगारी भत्ता की याद चुनावी साल मे ही आती है।
44169 करोड़ के बजट में सिचाई के लिये सिर्फ 3577 करोड़ अर्थात् बजट राशि के दसवे हिस्से से भी कम का प्रावधान कर भाजपा सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि उसे किसानों और सिचाई से कोई सरोकार नहीं है।
पावर प्लांटों को नदियों में एनीकट बनाकर पानी बेचने से ही सरोकार है। समोदा सिंचाई योजना 2003 मे बनी अभी तक वितरक नहर प्रणाली नहीं बनी ! इस बजट मे भी प्रावधान नही किया है।
निसदा से जी एम आर को महानदी का पानी जरूर बेच दिया गया जिसकी पाइप लाइन भी तैयार हो गयी है।
अगर प्रति व्यक्ति आय 2010-11 में 40166 थी और 2012-13 में बढ़कर 52689 होने जा रही है तो छत्तीसगढ़ पूरे देश में सबसे
ज्यादा बीपीएल परिवारों वाला राज्य कैसे बना ?
इन आँकड़ों में उतना ही विरोधाभास है जितना भाजपा सरकार के विकास में है। अमीर और अमीर हो रहे है और गरीब और गरीब !