रांची. थैलेसीमिया एक जटिल व खतरनाक बीमारी है। इससे पीडि़त मरीजों का आजीवन खून चढ़ाना पड़ता है। साथ में कंप्लीकेशंस भी। फिलहाल, थैलेसीमिया हमारा नेशनल प्रोब्लॉम बन चुका है। आईसीएमआर के आंकड़ों के मुताबिक सात से आठ फीसदी आबादी इस बीमारी से पीडि़त है। इसलिए अगर, इस बीमारी को रोकना है तो लोग को सामने आएं और शादी से पहले लड़के लड़कियों का थैलीसीमिया का स्क्रीनिंग कराएं। तभी इसे हम रोक सकेंगे। उक्त बातें मंगलवार को देश के ख्याति प्राप्त बायोकेमिस्टों ने कही।
मौका था एसीबीकॉन : 12 के अवसर पर वर्कशॉप का। यह कार्यक्रम रिम्स में हुआ। वर्कशॉप का आयोजन एसोसिएशन ऑफ केमिकल बायोकेमिस्ट ऑफ इंडिया के झारखंड चैप्टर व रिम्स के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। 12 से 14 दिसंबर तक नेशनल कांफ्रेंस खेलगांव स्थित सभागार में होगा। बुधवार को शाम सात बजे स्वास्थ्य मंत्री हेमलाल मुर्मू उद्घाटन करेंगे।
रिश्ते बनाते वक्त स्क्रीनिंग कराएं
सब जानते हैं कि थैलेसीमिक कैरियर माता पिता से बच्चा भी थैलेसीमिक होगा। फिर भी लापरवाही जारी है। फिलहाल हमलोगों ने यह तरकीब निकाला है कि शादी से पहले प्रत्येक लड़का लड़की का थैलेसीमिक स्क्रीनिंग हो। ताकि इस बीमारी के विस्तार को रोका जा सके। बदलते युग में बीमारियों के पहचान के अच्छे इंतजाम हो चुके हैं। लेकिन, इलाज अभी भी चुनौतीपूर्ण है। - डॉ यू सत्यनारायण, निदेशक(रिसर्च) डॉ पीएस इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज विजयवाड़ा.
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