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नरेंद्र मोदी के पास विकास का कॉन्सेप्ट नहीं : गोविंदचार्य

Kaushal Anand | Dec 16, 2012, 17:44PM IST

रांची। आरएसएस व भाजपा के पूर्व नेता व प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक के एन गोविंदचार्य रविवार को रांची में थे। वे देश के वर्तमान राजनीतिक हालात, एफडीआई, कॉरपोरेट-राजनीतिक गठजोड़ व नरेंद्र मोदी को बतौर पीएम प्रोजेक्ट करने आदि मसलों पर खुलकर बोले। गोविंदचार्य से भास्कर के वरीय संवाददाता कौशल आनंद ने विशेष बातचीत की।



प्रश्न : देश की वर्तमान राजनीतिक किस दिशा जा रही है, इसके क्या परिणाम होंगे ?



उत्तर : वर्तमान में कॉरपोरेट व राजनीति का गठजोड़ हो गया है, जो देश के लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक साबित हो रहा है। कॉरपोरेट जगत अंधे विकास की दौड़ में तेजी से लगा है, जिससे विकास का कॉन्सेप्ट ही बदल गया है। यह पर्यावरण व देश के अंतिम व्यक्ति के लिए नुकसान देह साबित हो रहा है। भारत का विकास भारतीय संस्कृति, आस्था व देश के लोगों को साथ लेकर हो सकता है।



प्रश्न : नरेंद्र मोदी को विकास पुरुष का दर्जा दिया जा रहा है और उन्हें भाजपा अगले पीएम के रूप में प्रोजेक्ट करने जा रही है, इस पर आपकी राय?



उत्तर : पहली बात तो यह है कि नरेंद्र मोदी के पास विकास का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। जो कुपोषण के बारे में यह कहें कि लोग डायटिंग कर रहे हैं, इसके कारण यह समस्या है, इससे पूरी बात समझ में आ जाती है। जब कोई व्यक्ति खुद को, अपने को प्रोजेक्ट करे तो इसमें कोई क्या कर सकता है। रही बात भाजपा की तो यह उनकी अंदरूनी मसला है, इसमें वे क्या कह सकते हैं। खैर, अभी काफी देर है। आगे देखिए होता क्या-क्या है?



प्रश्न : एफडीआई पर आपके क्या सोचते हैं?



उत्तर : जिस व्यवस्था को वाशिंगटन में खारिज कर दिया गया, वालमार्ट को देश से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, उसे हम अपनाने पर आमादा है, इससे हमारी सोच समझ में आती है। आखिरकार कब तक हम पश्चिमी देशों की फेंकी हुई चीजें अपनाते रहेंगे। यही चीज हमारे देश को खोखला कर रही है।



प्रश्न : विकास, भ्रष्टाचार व पर्यावरण संकट का एक दूसरे क्या संबंध है?



उत्तर : जब हम केवल मानव केंद्रित विकास की बात करते हैं तो नैतिकता ताक पर रख दी जाती है। नैतिकता ताक पर रखने से भ्रष्टाचार होता है। यही भ्रष्टाचार पर्यावरण को संकट की ओर धकेलता है। उपभोक्तावाद व बाजारवाद में हम सभी चीजें ताक पर रख देते हैं। आज भारत सहित पूरे विश्व में पर्यावरण की चिंता होने लगी है, आखिर क्यों? भारत का विकास किसी भी की कीमत पर मानव केंद्रित नहीं हो सकता है। इसके कारण ही भ्रष्टाचार व पर्यावरण संकट बढ़ा है।



प्रश्न : आपकी भविष्य की क्या योजनाएं हैं?



उत्तर : कल क्या होगा, किसने देखा है? अभी तो बस देश भ्रमण कर रहा हूं, देश को समझ रहा हूं। अगर हमारी उपयोगिता देश के लिए थोड़ी भी सही दिशा में साबित हो गई तो समझ लेंगे कि हमारा जन्म सार्थक हो गया। अभी हमारा ध्यान भारतीयता को बचाने की दिशा में लगा है।

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