रांची. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय कमेटी ने वित्तीय वर्ष 2011- -12 के लिए 5000 करोड़ का बजट पारित कर दो साल पहले सनसनी मचा दी थी। झारखंड स्थित सारंडा के घने जंगल में पार्टी के शीर्ष नेताओं की बैठक में 150 पेज के बजट को पेश किया गया था। इसमें झारखंड, बिहार व मध्यप्रदेश को 1500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। जबकि झारखंड सरकार ने अपने बजट में गृह विभाग को सुरक्षा के नाम पर 150 करोड़ रुपए दिए थे। यानि, सरकार से कई गुणा अधिक नक्सलियों के पास बजट की राशि थी।
किशन जी के बाद अब अरविंद जी बने नए हीरो
लातेहार में पिछले माह सीआरपीएफ के एक जवान के पेट में बम फिट करने वाला एरिया कमांडर अरविंद जी नक्सलियों का नया हीरो बन गया है। नक्सलियों के सर्वोच्च संगठन पोलित ब्यूरो में उसे शामिल करने की तैयारी है। नक्सलियों की आपसी बातचीत पर आधारित खुफिया रिपोर्टो में इसका खुलासा हुआ है।
नक्सली पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस करने के लिए सुरक्षित जगह की तलाश में जुटे हैं। लेकिन सुरक्षाबलों की लगातार दबिश के कारण वे सफल नहीं हो पा रहे। इसी कांग्रेस में ही पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के नए सदस्यों का चयन होना है।
जानिए कहां से नक्सलियों के पास आता है पैसा
नक्सल प्रभावित राज्यों में माओवादियों की मुख्य कमाई लेवी के रूप में वसूले गए पैसोंं से होती है। यह लेवी सरकारी विभागों, व्यापारिक घरानों से वसूली जाती है। लेवी की दर हर साल बढ़ा दी जाती है। जो बिजनेस हाउस पैसा देने से इनकार करते हैं, उनके ट्रक जला दिए जाते हैं और कर्मचारियों की पिटाई की जाती है। कई बार ठेकेदारों का अपहरण कर लिया जाता है। साल में तकरीबन 2500 ट्रक माओवादियों की भेट चढ़ जाते हैं। कई राजनेता भी चुनाव के लिए इन्हें धन मुहैया कराते हैं।
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