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28 सालों से झोपड़ी में चल रहा थाना

Pankaj Saw | Feb 09, 2013, 16:11PM IST

रांची/गिरिडीह/नवडीहा। उग्रवाद व अपराध का सामना कर इलाके में अमन-चैन बहाल करने वाली पुलिस इन दिनों खुद असुरक्षित महसूस कर रही है। पुलिस महकमा को आधुनिक संसाधनों से लैस करने की कवायद में भले ही सरकार जुटी है, करोड़ों खर्च भी हो रहे हैं। लेकिन व्यवस्था में बहुत कुछ परिवर्तन नहीं हुआ है। नक्सल प्रभावित जिला गिरिडीह के कई थानों की पुलिस अब भी बदहाल स्थिति में अपनी सेवा दे रही है। जहां आधुनिक संसाधनों का घोर अभाव है। जिसमें गिरिडीह जमुआ के नवडीहा ओपी की सर्वाधिक दुर्दशा है।


यह पिछले 28 सालों से एक झोपड़ी में चल रहा है। भाड़े की झोपड़ी में चल रहे इस थाने की जवाबदेही लगभग 45 हजार आबादी के सुरक्षा की है। लेकिन नवडीहा थाना खुद असुरक्षित है और भाड़े के एक मकान में पहरेदारी करना पुलिस की विवशता है। इस मकान का भाड़ा सालाना 5600 रुपए है। यहां के जवान खानाबदोश की जिंदगी जी रहे हैं। यहां न तो रहने की व्यवस्था है और न ही छापामारी के लिए वाहन की।


असुरक्षा के कारण थाने की रुतबा व पुलिस की ठसक भी यहां कमजोर पड़ती जा रही है। निहायत गरीब की तरह बगैर चहारदीवारी के एक झोपड़ी में यह थाना चल रहा है।


आगे की  स्लाइड्स में देखें झोपड़ी की सच्चाई...

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