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कारगिल के रणबांकुरे कैप्टन कालिया के मामले पर केंद्र को नोटिस

omparkash thakur | Dec 14, 2012, 11:57AM IST

चंडीगढ़। कारगिल वार में पाकिस्‍तान घुसपैठ की सबसे पहले जानकारी देने वाले रणबांकुरे कैप्टन सौरभ कालिया के मामले में सुप्रीमकोर्ट ने  केंद्र  सरकार से जवाब मांगा है।


 


कैप्टन कालिया के पिता ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उनके लाडले को सारी अंतरराष्‍ट्रीय संधियों का उल्लंघन करते हुए पाकिस्‍तान की सेना ने मार डाला था। कैप्टन को अमानवीय यातनाएं दी गई और उनके अंग तक निकाल डाले थे।कालिया व उसके साथियों  की आंखें निकाल दी गई थी । उनके शरीर को सिगरेटों से फूंका गया था और उनके प्राइवेट अंगों को काट डाला गया था। ये सब हुआ लेकिन केंद्र सरकार ने उनके मामले को न तो पाकिस्‍तान  के समक्ष उठाया और न ही अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर इस मामले को उठाया।


 


इसलिए पाकिस्‍तान पर अंतरराष्‍ट्रीय अदालत में मुकदमा चलाया जाए। कारगिल के इस रणबांकुरे को सेना और सरकार ने शहीद तक नहीं माना है।सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए दस सप्ताह का समय दिया है।


 


शीर्ष अदालत ने सरकार से पूछा है कि क्‍या अदालत ऐसे मामले में दखल दे सकती है।कैप्‍टन कालिया और उनके पांच साथियों को 15 मई 1999 को पाकिस्‍तानी सेना ने मार डाला था और इनकी लाशों को भारतीय सीमा में फेंक दिया था। कैप्‍टन कालिया के माता-पिता तब से लेकर  ये जंग लड़ रहे है। उनके पिता एनके कालिया का कहना है कि सैनिकों के लिए दुनिया भर में तमाम संधियां है और किसी भी सैनिक के साथ ऐसे अमानवीय व्‍यवहार नहीं किया जा सकता जैसा उनके लाडले और उसके साथियों के साथ हुआ था।


 


इस मामले को एन के कालिया ने प्रदेश से लेकर केंद्र तक के तमाम बड़े नेताओं और मंत्रियों से गुहार की थी । इसके अलावा मामला सेना से भी उठाया था। नेताओं ने वोट की राजनीति की और बाकियों ने उनकी अर्जी को दफन कर दिया। आखिरकार उन्‍हें सुप्रीम कोर्ट  का दरवाजा खटखटाना पड़ा

  
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