ट्रेनों से निकालकर जिंदा जला दिए थे 28 सिख सैन्य अफसर और जवान

चंडीगढ़। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के तुरंत बाद भड़के दंगों की कुछ दबी परतें आज 28 साल बाद भी खुलती जा रही हैं। नवंबर 1984 में दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशन तुगलकाबाद नगलोई पहुंची ट्रेनों से 63 सिखों को निकालकर जिंदा जला दिया गया था। इन 63 सिखों में 28 फौजी अफसर और जवान भी शामिल थे। हत्या से पहले सभी से बुरी तरह मारपीट की गई और उन्हें बेइज्जत किया गया। हमलावरों की अगुआई उस समय के स्थानीय कांग्रेसी नेता कर रहे थे। यह खुलासा ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फैडरेशन के प्रधान करनैल सिंह पीरमोहम्मद ने सोमवार को ऑल इंडिया डिफेंस ब्रदरहुड (पंजाब) के प्रधान रिटायर ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह काहलों, लेफ्टिनेंट जर्नल करतार सिंह गिल, ब्रिगेडियर हरवंत सिंह और कई अन्य वरिष्ठ सैन्य अफसरों एवं एयर फोर्स के अफसरों के सामने किया। इस बारे में ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फैडरेशन ने संबंधित दस्तावेज भी हासिल किए हैं, जिनमें इस हत्याकांड से संबंधित एफआईआर भी शामिल है। यह एफआईआर (नंबर 355) 1 नवंबर 1984 को रेलवे पुलिस दिल्ली ने आईपीसी की धारा 147, 148, 201, 302 और 295 के तहत दर्ज की थी।
इन सैन्य अफसरों और जवानों की हुई हत्या :
1. लेफ्टिनेंट कर्नल एएस आनंद (74 आम्र्ड रेजीमेंट)
2. फ्लाइट लेफ्टिनेंट हरिंदर सिंह
3. कैप्टन आईपीएस बिंद्रा (63 कैवलरी)
4. मेजर सुखजिंदर सिंह (150 फील्ड रेजीमेंट)
5. कैप्टन एसएस गिल (89 आम्र्ड रेजीमेंट)
6. सूबेदार रणजीत सिंह (22 सिख बटालियन)
7. सूबेदार दर्शन सिंह (इनलेटीजेंस कॉप्र्स)
8. कैप्टन यूपीएस सज्जल
9. सूबेदार अनूप सिंह (सिगनल कॉप्र्स)
10. नायब सूबेदार सुरजीत सिंह (1 सिख लाइट इन्फेंटरी)
(मरने वालों में इसके अलावा कई अन्य सैन्य अफसर और जवान शामिल थे।)
ज्यूडिशियल कमीशन का गठन हो
पीरमोहम्मद, ब्रिगेडियर काहलों, एडवोकेट तेजिंदर सिंह सूदन और पूर्व अफसरों ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रक्षा मंत्री एके एन्टनी, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल विक्रम सिंह से मांग की है कि उक्त फौजी अफसरों और आम सिखों के कातिलों को ढूंढऩे और सजा दिलाने के लिए अलग तौर पर ज्यूडिशियल कमीशन का गठन किया जाए, जो इस बात का पता लगाए कि 28 साल बीतने के बावजूद दोषियों का पता लगाने के लिए पुलिस की जांच एजेंसियां असफल क्यों रहीं। उन्होंने कहा कि देश के फौजी अफसरों और जवानों का एक ही रेलवे स्टेशन पर एक ही दिन कत्लेआम अपने आप में शर्मसार कर देने वाली घटना है। इन फौजी अफसरों और जवानों को जंगी शहीद घोषित कर इनके परिवारों को सर्वोच्च अवॉर्डों से सम्मानित किया जाना चाहिए और उनके परिवार के एक-एक सदस्य को योगयता के अनुसार फौज या अन्य विभागों में नौकरी दी जानी चाहिए। पीरमोहम्मद ने कहा कि यह मामला आज तक सामने नहीं आया है। फैडरेशन की ओर से इस मामले को अब उजागर किया गया है।
लोकसभा और विधानसभा में उठाया जाए मुद्दा
पीरमोहम्मद ने कहा कि फौजी अफसरों और आम सिखों के सरेआम हुए कत्ल का मुद्दा लोकसभा और विधानसभा में उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा के सेशन के दौरान इन फौजी अफसरों और जवानों को श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए और दोनों सदनों में इस भयानक घटना पर बहस होनी चाहिए।
रेलवे, डिफेंस और गृह मंत्रालय का घेराव करेगी फैडरेशन
पीरमोहम्मद ने बताया कि इस घटना में इंसाफ की मांग को लेकर फैडरेशन रेलवे, डिफेंस और गृह मंत्रालय से संबंधित मंत्रियों और अफसरों का घेराव करेगी। उन्होंने कहा कि रेलवे ने यह मामला इतने दिनों तक दबाए रखा, गृह मंत्रालय ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और डिफेंस ने अपने अफसरों और जवानों की मौत पर आज तक कोई इंक्वायरी नहीं बिठाई।
22 और सिख अफसर लापता
पीरमोहम्मद ने बताया कि फैडरेशन को जानकारी मिली है कि इसी तरह 22 अन्य सिख अफसर भी लापता हैं। आशंका है कि वे भी अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर मारे गए, लेकिन इस बात का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है, क्योंकि इस बारे में अभी तक कोई एफआईआर सामने नहीं आई है। उस बारे में भी फैडरेशन पता लगा रही है।
फैडरेशन ने पहले यह मामले किए उजागर
सिख स्टूडेंट्स फैडरेशन की ओर से इससे पहले हरियाणा के होंद चिल्लड़, पटौदी, कनीना मंडी, रिवाड़ी तलवाड़ा टाउनशिप सलार डैम रियासी-जम्मू और बोकारो-झारखंड में हुए ऐसी वारदातों को उजागर किया जा चुका है।






