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राणा गुरजीत सदन से निलंबित, कांग्रेस ने किया सत्र का बहिष्कार

Inder Preet | Dec 19, 2012, 17:45PM IST

चंडीगढ़। लॉ एंड आर्डर पर बुधवार को पंजाब विधानसभा में चल रही बहस से दोनों पक्षों के बीच इतनी गरमा-गर्मी हो गई कि कांग्रेसी विधायक राणा गुरजीत सिंह और लोक संपर्क मंत्री बिक्रम मजीठिया एक दूसरे को गाली-गलौच पर उतर आए। स्पीकर चरनजीत सिंह अटवाल ने राणा गुरजीत सिंह को रहते सदन के दिनों के लिए निलंबित कर दिया। स्पीकर की इस कार्रवाई से नाखुश विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सदन का बहिष्कार कर दिया और स्पीकर पर पक्षपाती होने का आरोप लगाते हुए विपक्ष के नेता सुनील जाखड़ ने ऐलान किया कि पार्टी कल उनका घेराव करेगी। दिलचस्प बात यह रही कि इस पूरी कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने एक शब्द भी नहीं कहा।
इससे पहले आज सदन में उस समय माहौल गरमा गया जब बिक्रम मजीठिया लॉ एंड आर्डर पर बोल रहे थे। कांग्रेसी विधायकों ने उन्हें अमृतसर में एएसआई रविंदरपाल सिंह की हत्या का दोषी ठहराते हुए मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग की और वेल में आकर बिक्रम के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। स्पीकर के बार बार उन्हें अपनी सीट पर जाने के लिए कहने के बावजूद वे अपनी सीटों पर नहीं गए। उधर बिक्रम मजीठिया ने कांग्रेसी विधायकों राणा गुरजीत सिंह, बलबीर सिंह सिद्धू पर आरोप लगाया। बिक्रम ने कहा, राणा गुरजीत सिंह की सुखदेव सिंह नामधारी के साथ सांझ है और नामधारी को जो आर्म लाइसेंस जारी हुआ है वह राणा गुरजीत सिंह की सिफारिश पर हुआ है। इतना सुनते ही वेल में नारेबाजी कर रहे राणा गुरजीत अपनी सीट पर आ गए और तैश में आकर बिक्रम की ओर इशारा करके कुछ बोलने लगे। उधर बिक्रम भी तैश में आ गए। राणा कुछ बोलते हुए आगे बढ़ रहे थे तभी बिक्रम मजीठिया भी उन्हें गाली देते देते रुक गए। चूंकि बिक्रम के सामने वाला स्पीकर ऑन था इसलिए उनकी गाली सभी ने सुनी। दोनों में एक दूसरे को देख लेने तक की बात हुई। कांग्रेसी विधायक वेल से होते हुए अकाली दल के विधायकों की ओर आए तो बिक्रम के बचाव में अकाली-भाजपा के विधायक भी आ गए। तभी कुछ सीनियर विधायकों ने बीच बचाव किया और स्पीकर ने आधे घंटे तक के लिए हाउस को स्थगित कर दिया।
आधे घंटे बाद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही संसदीय कार्य मंत्री मदन मोहन मित्तल सदन में प्रस्ताव लाना चाहते थे कि उससे पहले सुखबीर बादल ने कहा, राणा गुरजीत माफी मांगें या फिर उन्हें निलंबित किया जाए अन्यथा वह सदन की कार्यवाही नहीं चलने देंगे। इसी बीच मदन मोहन मित्तल ने सदन में प्रस्ताव रखकर राणा गुरजीत को माफी मांगने और या उन्हें निलंबित करने का प्रस्ताव रखा। राणा ने कोई उत्तर नहीं दिया तो स्पीकर ने उन्हें रहते सदन के लिए निलंबित कर दिया।

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