पंचकूला। कारगिल युद्ध में हुई जबर्दस्त गोलाबारी झेल चुके रिटायर्ड मेजर देवेन्दर पाल सिंह रविवार को पंचकूला में होने वाली 21.1 किलोमीटर की रनिंग एंड लिविंग हाफ मैराथन में जमकर दौड़े। सिंह करगिल युद्ध में अपना दायां पैर खो चुके हैं। युद्ध में एक गोला उनके सामने आकर गिरा और जोरदार धमाके के साथ फट गया। इससे उनके पूरे शरीर में गोले के कई छर्रे घुस गए। आज भी उनके शरीर में 40 छर्रे हैं, लेकिन उनके हौसले पहले जितने ही मजबूत हैं। सिंह इस हादसे में अपना दायां पैर खो चुके हैं। उन्हें आर्टिफिशियल लेग ब्लेड लगाई गई है। इससे वे मैराथन में भाग लेकर लोगों को प्रेरित करते हैं। हालांकि आर्टिफिशियल लेग ब्लेड से दौडऩा आसान नहीं होता।
मृत घोषित कर दिया गया था: सिंह बताते हैं बम का धमाका इतना बड़ा था कि सब तितर-बितर हो गया था। मेरे साथी जवानों ने समझा कि मेरी मौत हो गई है। मुझे मृत समझकर ही अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन वहां जब एक डॉक्टर ने मेरा चेकअप किया तो मेरी धड़कन चल रही थी। इसके बाद मेरा इलाज शुरू किया गया। गोले के ज्यादातर छर्रे तो मेरे शरीर से निकाल दिए गए लेकिन अभी भी मेरे शरीर में 40 छर्रे मौजूद हैं।कुछ ऐसे ही लोगों में से हैं 'द चैलेंजिंग वन्सÓ। 'द चैलेंजिंग वन्सÓ एनजीओ में शारीरिक रूप से अक्षम लोग शामिल हैं। पंचकूला में रविवार को आयोजित तीसरी पंचकूला रनिंग एंड लिविंग क्रॉस कंट्री मैराथन में द चैलेंजिंग वन्स के पांच सदस्यों ने हिस्सा लिया। उनका मकसद था अपने साथी आकाश मेहरा के इलाज में मदद करना, जो एक रेल हादसे में अपनी दोनों टांगें गंवा चुके हैं।
'द चैलेंजिंग वन्सÓ के सदस्यों का कहना है कि अगर लोग उनकी सहायता में आगे आएं तो वे भी सबके साथ कदम से कदम मिलाने का जज्बा रखते हैं। इस ईवेंट में छोटे बच्चों से लेकर 68 वर्ष तक के बुजुर्ग भी मन में कुछ कर दिखाने का जज्बा लिए दौड़ते नजर आए। ज्यादा उम्र वाले लोग दौड़े, थककर रुक गए, पानी पीया और फिर शुरू हो गए।
पंचकूला में 6 जनवरी को तीसरी पंचकूला रनिंग एंड लिविंग क्रॉस कंट्री मैराथन में 250 लोगों ने हिस्सा लिया। सभी दौड़ें नॉर्थ पार्क होटल पंचकूला से शुरू हुईं और नॉर्थ पार्क होटल में ही समाप्त हुईं। इसमें हर आयु वर्ग के पुरुषों और महिलाओं ने हिस्सा लिया।
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