अकाल तख्त के जत्थेदार गुरबचन सिंह को पूर्व जत्थेदार ने दी खुली चुनौती

चंडीगढ़। अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार प्रोफेसर दर्शन सिंह ने मौजूदा जत्थेदार गुरबचन सिंह को चुनौती दी है कि कि वो उनके पंथ से निष्कासन को सार्वजनिक रूप से सही ठहराए। पंथ को ये जानने का हक है कि उनका निष्कासन क्यों किया गया है।साथ ही उन्होंने कहा कि अगर वो उनके आरोपों को साबित नहीं कर पाते है तो अकाल तख्त की जत्थेदारी से त्यागपत्र दे दें।
पूर्व जत्थेदार दर्शन सिंह ने आज एक नया संगठन खड़ा कर दिया। संगठन का नाम रखा है गुरु ग्रंथ दा खालसा । इस मौके पर पत्रकारों से रूबरू हुए पूर्व जत्थेदार ने कहा कि उनका निष्कासन उनके ओर से उठाए गए सवालों का जवाब दिए बगैर कर दिया गया है। ये सब सिख धर्म के उसूलों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सिखों पर पहले भी हमले हुए है पर अब हमला सिखी पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब सिखी का केंद्र रहा है लेकिन कुछ ताकतें दशम् ग्रंथ को गुरु ग्रंथ साहब के बराबर सुशोभित कर सिखों को गुरु ग्रंथ साहिब से अलग करना चाहते है।
पूर्व जत्थेदार ने कहा कि वो ऐसी ताकतों की ओर से किए जा रहे गुमराह पूर्ण प्रचार को लेकर सिखों को जागरूक करेंगे।
उन्होंने कहा कि उनका संगठन धार्मिक है लेकिन अगर धार्मिक ताकतें सियासी ताकतों के दबाव में आकर काम करेगी तो उनका विरोध किया जाएगा।








