पहाड़ भी इतने खतरनाक हैं कि उन पर चढ़ना मुश्किल है। नीचे पार्वती नदी बहती है, जो हिमालय की तेज बहती नदियों में गिनी जाती है। पहले आना-जाना नदियों के साथ-साथ होता था। इसलिए नानक देव जी पहले मण्डी आए होंगे, फिर ब्यास के साथ-साथ और दुर्गम होते चले गए और भूंतर पहुंचे होंगे। यहां से पार्वती नदी पकड़ ली और मणिकर्ण पहुंच गए।