हिन्दू का स्वाभिमान नष्ट होता जा रहा था. उनकी अन्याय एवं अत्याचार के विरुद्ध प्रतिकार करने की शक्ति लुप्त होती जा रही थी आगरे से हिन्दुओं पर अत्याचार की खबर फैलते फैलते लाहौर तक पहुंच गयी। हिन्दू स्वाभिमान के प्रतीक भाई मतिराम की आत्मा यह अत्याचार सुन कर तड़प उठी। उनके हृदय ने चीख चीख कर इस अन्याय के विरुद्ध अपनी आहुति देने का प्रण किया।उन्हें विश्वास था की उनके प्रतिकार करने से ,उनके बलिदान देने से निर्बल और असंगठित हिन्दू जाति में नवचेतना का संचार होगा।