तब हाकिम ने बोला तो तुम्हे अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा तब मतिराम ने कहा की मुझे धर्म छोडऩे की अपेक्षा अपना शरीर छोडऩा स्वीकार है।हाकिम ने फिर कहा की मतिराम फिर से सोच लो। मतिराम ने फिर कहा की मेरे पास सोचने का वक्त नहीं हैं हाकिम,तुम केवल और केवल मेरे शरीर को मार सकते हो मेरी आत्मा को नहीं क्योंकि आत्मा अजर ,अमर है। न उसे कोई जला सकता हैं न कोई मार सकता है मतिराम को इस्लाम की अवमानना के आरोप में आरे से चीर कर मार डालने का हाकिम ने दंड दे दिया।चांदनी चौक के समीप खुले मैदान में लोहे के सीखचों के घेरे में मतिराम को लाया गया।दो जल्लाद उनके दोनों हाथों में रस्से बांधकर उन्हें दोनों और से खींचकर खड़े हो गए, दोनों ने उनकी ठोड़ी और पीठ थामी और उनके सर पर आरा रखा।