चंडीगढ़। चमत्कार ना दिखाने और धर्म भी ना बदलने की वजह से लगातार जुल्म करने के बाद मुगल बादशाह ने जब चांदनी चौक पर सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी का शीश काटा तो उसे आनंदपुर साहिब तक पहुंचाते हुए ट्राईसिटी के पास भी एक रात के लिए रखा गया था।
जीरकपुर में इस स्थान पर बना है गुरुद्वारा नाभा साहिब। कटे शीश को आनंदपुर साहिब पहुंचाने वाले भाई जैता जी को गुरु गोबिंद सिंह जी ने नाम दिया, रंगरेटा गुरु का बेटा।
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