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ओह! तो यह है गोरी मेम की लिपिस्टक का राज!

Pratik Shekhar | Dec 17, 2012, 10:56AM IST

भोपाल/श्योपुर। कराहल और इसके आस-पास उगने वाला एक जंगली पौधा (पवार) आदिवासियों की आमदनी का जरिया बन गया है। खासकर साल के दो महीने (अक्टूबर-नवंबर) में तो वे मजदूरी छोड़कर इसी काम में जुट जाते हैं। पवार (केसियोटोरा) की ब्रिटेन और चीन में काफी डिमांड है। ब्रिटेन में पवार खरपतवार का उपयोग पेट से संबंधित बीमारियों की दवाई, सौंदयज़् प्रसाधन की सामग्री (जैसे फेस पाउडर, लिपिस्टिक) बनाने में किया जाता है। वहीं चीन में इसका उपयोग ऑइल पेंट बनाने में होता है। ऑइल पेंट में पवार मिलाने पर दीवारों पर पेंट की चमक फीकी नहीं पड़ती है।


चिकनाई ज्यादा होती है: गोपाल कृष्ण मुदगल, कृषि वैज्ञानिक
पवार में चिकनाई होने के कारण इसका उपयोग चिकनाई वाली सामग्री और दवाएं बनाने में किया जाता है। विदेशों में इसका उपयोग अधिक होता है।


विदेशों में काफी मांग: संदीप शुक्ला, एसडीओ, श्योपुर
विदेशों से इसकी काफी मांग है। इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधन और दवा बनाने में किया जाता है। कराहल से बाहर के व्यापारी इसकी खरीद करते हैं।


चीन,ब्रिटेन भेजते हैं: सोनी अग्रवाल, दीपक ट्रेडर्स
आदिवासियों से खरीदे गए पवार खरपतवार को हम मुंबई और जयपुर भेजते हैं। वहां से इसे चीन और ब्रिटेन भेजा जाता है।

 

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