मूलत: खंडवा जिले के बरुड़ गांव के रहने वाले नेत्रहीन दंपती अनारसिंह और मिश्रीबाई (परिवर्तित नाम) अपने पांच वर्षीय बेटे के साथ हरदा जिले के नर्मदा घाट हंडिया में स्नान करने गए थे। इस दौरान वे भीड़ में एक-दूसरे से बिछड़ गए। बेटे ने पिता का हाथ थामे रखा, लेकिन नेत्रहीन मां भीड़ में गुम हो गई।