इलाज तक नहीं कराया। उसे न तो बच्चों के साथ खेलने देते थे और न ही घर से निकलने देते थे। वे शिवानी से बड़ों जैसा काम लेते थे। देर रात उसे निर्वस्त्र कर ठंडा पानी डालते और डंडों से पीटते थे। उस रात ९.३० बजे भी ऐसा ही हुआ था। शिवानी को खूब पीटा गया था। तीन बार चीखने की आवाज आई... फिर खामोश हो गई।