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भारत आने से क्यों हिचकिचाते हैं चीनी?

BBC Hindi | Dec 13, 2012, 08:48AM IST

दिल्ली।लगभग पांच करोड़ चीनी हर वर्ष विदेश यात्राओं पर जाते हैं लेकिन इनमें से केवल एक लाख के क़रीब ही भारत आते हैं. इधर भारत से चीन जाने वालों की संख्या कई लाख है. पर्यटन मंत्रालय के ताज़े 'भारतीय पर्यटक आंकड़ों' के मुताबिक साल 2010 में यहां से चीन जाने वालों की संख्या साढ़े पांच लाख से अधिक थी और लगभग इतने ही लोग यहां से हॉन्गकॉन्ग भी गए. ऐसा नहीं है कि दूसरे देशों से भारत आने वालों की संख्या बहुत कम है. पर्यटन विभाग के अनुसार भारत में पिछले साल 63 लाख से ज्यादा पर्यटक आए जिनमें सबसे अधिक अमरीका (9,80,688) से थे.


 

बस दो प्रतिशत
इसके बाद ब्रिटेन का नंबर था जहां से लगभग आठ लाख (7,98,249) लोग भारत आए. बांग्लादेश से 4,63,543 लोग भारत आए. लेकिन पिछले साल पडो़सी देश चीन (मेनलैंड चाइना से) से केवल 1,42,218 पर्यटक ही भारत आए. हॉन्गकॉन्ग की बात करें तो वहां से केवल 1,712 लोग ही भारत पहुंचे. भारत में कुल विदेशियों की तुलना में चीनी करीब दो प्रतिशत ही आ रहे हैं. साल 2009 में भारत में 51 लाख से अधिक विदेशी पहुँचे थे जिनमें केवल एक लाख से कुछ अधिक चीनी थे. साल 2010 में भी ऐसा ही कुछ हाल था. चीनियों की संख्या थी 1.2 लाख से कम जबकि कुल विदेशी थे 57 लाख से अधिक. भारत आने वाले चीनी अधिकर व्यापारिक कारणों से आते हैं. पिछले साल भारत आने वालों में लगभग 67 प्रतिशत व्यापारिक कारणों की वजह से यहां आए. लेकिन केवल करीब 13 प्रतिशत लोग यहां घूमने या छुट्टियां मनाने के इरादे से आए जबकि अपने मित्रों या संबंधियों से मिलने के लिए आने वाले केवल छह प्रतिशत चीनी ही थे. 'चीन बढ़िया लेकिन भारत...'
 
क्या कारण है कि चीन से कम लोग भारत आ रहे हैं? बीजिंग में भारत के पर्यटन विभाग की निदेशक दीपा लस्कर ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''चीन में सुविधाएं बहुत बढ़िया हैं शायद विश्व में सबसे बढ़िया. जो लोग भारत से यहाँ आते हैं वो बहुत खुश होकर वापस जाते हैं.'' उन्होंने कहा, ''लेकिन भारत जाने वाले चीनियों के बारे में ऐसा नहीं कह सकते, शायद राजस्थान को छोड़कर. चीनी लोगों के लिए खर्च करने में कोई समस्या नहीं है लेकिन ये लोग गुणवत्ता चाहते हैं.''  

जानकारों के अनुसार चीनी लोगों के लिए खर्च करने में कोई समस्या नहीं है लेकिन ये लोग गुणवत्ता चाहते हैं


 

लस्कर ने कहा, ''फिर भारत के बारे में उनकी अपनी कुछ धारणाएँ हैं. वे यूरोप, अमरीका और दूसरे देशों में जाना अधिक पसंद करते है.'' उनका मानना है, ''एक कारण यह भी है कि भारत उस तरीके से अपने आप को इतने अच्छे से बेच भी नहीं पाया है. लेकिन अब हम इसके लिए प्रयास कर रहे हैं.''   

 

कोई अधिकारी नहीं
एक अधिकारी का कहना था कि लगभग पूरा साल तो बीजिंग में भारत का कोई निदेशक ही नहीं था यानी मई 2011 से लेकर मार्च 2012 तक. एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारत में चीन की भाषा बोलने वाले गाइड भी इतनी आसानी से नहीं मिलते और न ही अच्छा चीनी खाना जिसकी वजह से टूर ऑपरेटर भी भारत के बारे में प्रचार नहीं करते. लेकिन भारत में बसे कुछ चीनी लोगों का कहना है कि यहां वीज़ा को लेकर कई मुश्किलें आती हैं.  
चीन के लोगों की राय
दिल्ली में एक दुकान चलाने वाली चीनी मूल की वी चू कहती हैं, ''वीज़ा को लेकर आने वाली मुश्किलों की वजह से चीन के लोग यहाँ नहीं आते. उन्हें एक बार में दो ही महीनों का वीज़ा दिया जाता है और फिर वापस जाने के लिए एग्ज़िट वीज़ा लेना होता है. और फिर भारत चीन के लोगों को आकर्षित करने के कोई खास प्रयास भी नहीं करता.'' भारत के अधिकारी बताते हैं कि एग्ज़िट वीज़ा केवल तब लेना होता है अगर आप का वीज़ा समाप्त हो गया हो. चीन का पर्यटन बाज़ार लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है और कई देश इसका फायदा भी उठा रहे हैं क्योंकि चीनी विदेशों में जा कर काफी पैसा खर्च करते हैं जिससे इन देशों की अर्थव्यवस्था में बढ़ोत्तरी होती है. पिछले साल अपनी विदेश यात्राओं पर चीनी लोगों ने 7.3 अरब डॉलर (यानी 400 अरब रुपए से अधिक) खर्च किए जो कि विश्व में जर्मनी और अमरीका के बाद तीसरे नंबर पर है. बहरहाल चीन के बढ़ते पर्यटक बाज़ार का फायदा निकट भविष्य में तो भारत को होता प्रतीत नहीं होता.
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