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महंगाई से बेहतर रिटर्न देते हैं डेट म्यूचुअल फंड

संदेश किरकिरे | Nov 02, 2012, 00:27AM IST
महंगाई से बेहतर रिटर्न देते हैं डेट म्यूचुअल फंड

डेट एसेट में एलोकेशन का अनुपात व्यक्ति की उम्र के साथ बढ़ाया जाना चाहिए। जैसे-जैसे निवेशक की उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे ऊंचे रिटर्न के लिए निवेश में जोखिम लेने की उसकी क्षमता कम होती जाती है। उम्र बढऩे के साथ ही निवेश पर नियमित आय की जरूरत भी बढ़ जाती है।
संपत्ति लंबे समय में बनाई जाती है और इस काम को मौजूदा जीवनशैली से समझौता करके नहीं किया जाना चाहिए। हमारे निवेश का तरीका कुछ ऐसा होना चाहिए कि निवेश से मिलने वाले रिटर्न की रकम मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर से अधिक हो, और यही है संपत्ति सृजन का तरीका, अन्यथा मुद्रास्फीति संपत्ति को गटक जाएगी।


संपत्ति सृजन का मूल नियम है कि निवेशक विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करें, यही एसेट एलोकेशन है। हालांकि, विभिन्न परिसंपत्तियों में जोखिम के स्तर भी अलग-अलग होते हैं और इन  जोखिमों को विभिन्न निवेश समयावधि में निवेश कर पार किया जा सकता है। पर ध्यान रखिए कि जिस विकल्प में जोखिम ज्यादा होता है उसमें रिटर्न की संभावना भी उतनी ही ज्यादा होती है। इसका मतलब यह भी नहीं कि जल्दबाजी की जाए। उदाहरण के तौर पर अगर किसी युवा को अगले 2-3 सालों में घर खरीदना है तो उसके निवेश के बड़े हिस्से को इक्विटी में लगाने का मतलब जोखिम होगा।


संपत्ति सृजन के लिए विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में मुख्यत: इक्विटी, डेट, रियल एस्टेट व गोल्ड शामिल हैं। इसमें सबसे कम जोखिम डेट में होता है, इसके बाद गोल्ड, रियल इस्टेट व फिर इक्विटी का नंबर आता है।


इसे यूं समझें कि जब कोई इक्विटी खरीदता है तो वह असलियत में कारोबार का एक हिस्सा खरीदता है और यही कारण है कि इक्विटी में निवेश लंबे समय के लिए किया जाना चाहिए। हालांकि, हमारे यहां के निवेशक इक्विटी को शॉर्ट टर्म निवेश के रूप में देखते हैं। यही कारण है कि सेकंडरी इक्विटी मार्केट सेगमेंट में कुल कारोबार का तकरीबन 90 फीसदी डेरिवेटिव में होता है।


मेरा यह भी मानना है कि इक्विटी बाजार प्रकृति में होलसेल बन गया है लिहाजा खुदरा निवेशक के लिए किसी कंपनी पर शोध करना कठिन होता है। दरअसल किसी कंपनी पर शोध करने के लिए काफी मेहनत की दरकार होती है क्योंकि किसी भी कंपनी की वृद्धि अर्थव्यवस्था की वृद्धि संभावना, जिस सेक्टर में कंपनी कार्यरत है, उसमें वृद्धि की संभावना, कंपनी का अर्निंग मॉडल और खर्चों तथा आय का आकलन आदि पर निर्भर रहता है।
और यहीं पर म्यूचुअल फंड खुदरा निवेशकों के सामने वरदान के रूप में सामने आता है। 


म्यूचुअल फंड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें खुदरा निवेशक को बिल्कुल कम रकम के बदले इक्विटी में निवेश का अवसर मिल जाता है और उसे सीधे-सीधे कंपनियों में निवेश भी नहीं करना पड़ता है। यहां पर यह भी ध्यान रखें कि म्यूचुअल फंड शेयर बाजार से जुड़ा होता है लिहाजा अगर बाजार यानि कि निफ्टी व सेंसेक्स नकारात्मक हैं तो म्यूचुअल फंडों के रिटर्न भी नकारात्मक होंगे।


मेरा मानना है कि भारत में डेट में निवेश करना एकदम आरामदेह है। यह इकलौता ऐसा परिसंपत्ति वर्ग है जिसमें निवेशक सीधे निवेश करता है जबकि अन्य प्रत्येक परिसंपत्ति वर्ग इंटरमीडिएटरी प्रकृति वाली हैं। यह निवेशकों के लिए उपलब्ध निवेश एवेन्यू में सबसे सुरक्षित है हालांकि अन्य परिसंपत्ति वर्गों की तुलना में इसका रिटर्न भी कम है। वैसे डेट कैटेगरी में डिबेंचर्स सरीखे अन्य निवेश विकल्प भी होते हैं।


जहां तक डिबेंचर्स की बात है तो ये कॉरपोरेट द्वारा जारी ब्याज वाहक इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं जिनकी परिपक्वता तय होती है। डिबेंचर्स व बांड के साथ जो रिस्क जुड़ा होता है वह मुख्यत: डिफॉल्ट का जोखिम होता है। लिहाजा वह सरलता से उपलब्ध अन्य डेट इंस्ट्रूमेंट्स की तुलना में बेहतर रिटर्न की पेशकश करते हैं। इसके अलावा जब ब्याज दरें गिरती हैं तो बांड व डिबेंचर्स की कीमतें बढ़ जाती हैं और ब्याज दरें बढ़ती हैं तो बांड व डिबेंचर्स कीमतें घट जाती हैं।


जैसा कि मैं पहले ही कह चुका हूं कि इक्विटी बाजार प्रकृति में होलसेल बन गया है लिहाजा बाजार में कोई भी डेट म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश कर सकता है। यानी कि वाया डेट म्यूचुअल फंड निवेशक इक्विटी बाजार में भी सहभागी हो सकते हैं। म्यूचुअल फंड बाजार में विभिन्न प्रकार के डेट म्यूचुअल फंड उपलब्ध हैं जिनका जोखिम स्तर व परिपक्वता की अवधि अलग-अलग होता है।


इसमें ऐसे भी उत्पाद हैं जिसमें एक दिन जैसे न्यूनतम दिन के लिए भी निवेश किया जा सकता है। वैसे आम तौर पर निवेशकों के  लिए ऐसे डेट म्यूचुअल फंडों की संस्तुति की जाती है जिसमें निवेश अवधि एक साल से ज्यादा की हो। तभी अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना अधिक होती है।


डेट परिसंपत्ति वर्ग में एलोके शन कई कारकों पर निर्भर रहता है पर इसमें सबसे महत्वपूर्ण है निवेशक की रिस्क रिटर्न प्रोफाइल व निवेश होराइजन। निवेशक मुद्रास्फीति को मात देने के लिए डेट म्यूचुअल फंड का उपयोग कर सकते हैं। डेट म्यूचुअल फंड का उपयोग पोर्टफोलियो की अपेक्षाकृत स्थिरता देने के लिए भी किया जा सकता है।


स्थिरता का कारक ऐसी एक वजह है कि डेट एसेट में एलोकेशन का अनुपात व्यक्ति की उम्र के साथ बढ़ाया जाना चाहिए। दरअसल जैसे-जैसे इंसान की उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे ऊंचे रिटर्न के लिए निवेश में जोखिम लेने की उसकी क्षमता कम होती जाती है। ठीक उसी समय यानी कि उम्र बढऩे के साथ ही निवेश पर नियमित आय की जरूरत भी बढ़ जाती है। और इस तरह की समस्त निवेशकीय आवश्यकताओं को डेट म्यूचुअल फंड में नियमित निवेश के जरिए पूरा किया जा सकता है।


इसके साथ ही यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि इक्विटी, डेट, रियल एस्टेट व गोल्ड सरीखे विभिन्न परिसंपत्ति वर्ग मुख्यत: अलग-अलग तरह का व्यवहार विभिन्न कारोबारी चक्रों में करते हैं। पर यह भी सच्चाई है कि रिसेशनरी या मॉडरेटिंग माहौल में यानी कि जिस प्रकार के माहौल से इन दिनों हम गुजर रहे हैं, डेट एसेट क्लास या गोल्ड एसेट क्लास अन्य परिसंपत्ति वर्गों को पीछे छोड़ सकता है। हम इसे 2004 से 2008 के बीच देख भी चुके हैं कि वृद्धि के माहौल में यानि कि अच्छे समय में इक्विटी व रियल एस्टेट ने अन्य परिसंपत्ति वर्गों को पीछे छोड़ दिया था।


और अंत में मैं यह कहना चाहूंगा कि कामयाब निवेश के लिए जरूरी है कि आपके पास दीर्घावधि की निवेश योजना हो, उस योजना पर आप अडिग रहें और विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में आप निवेश करें। यह ध्येय आप म्यूचुअल फंड में निवेश के जरिए पूरा कर सकते हैं। दरअसल म्यूचुअल फंड में निवेश ऐसा ही होता है। हैप्पी इन्वेस्टिंग।
संदेश किरकिरे - लेखक कोटक म्यूचुअल फंड के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर हैं।

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