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बलात्कार मामले की गूंज बिहार में

BBC Hindi | Dec 28, 2012, 16:40PM IST
 
 


पटना। दिल्ली में हाल ही में यौन हिंसा के खिलाफ़ उभरे भारी जनाक्रोश का असर बिहार में भी हुआ है. इस बाबत राज्य के कई हिस्सों में एक हफ़्ते से धरना-प्रदर्शन का सिलसिला जारी है. पटना में बुधवार को नागरिक समाज की पहल पर आयोजित प्रतिरोध जनसभा में वक्ताओं ने कहा कि यौन हिंसा की बढ़ती घटनाओं से इन दिनों बिहार भी आतंकित है. इस आयोजन में 'ऐपवा' और 'आइसा' नामक वाम छात्र-महिला संगठनों के अलावा साहित्यकारों, शिक्षकों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया. जनसभा में मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर चर्चा ज़्यादा हुई. पहली मांग ये की गई कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर यौन दुष्कर्मों के खिलाफ़ सख्त क़ानून पारित हो और समय-सीमा के भीतर ऐसे शत-प्रतिशत मामलों में सज़ा सुनाई जाए. दूसरी बात ये कही गई कि उन तमाम पितृ-सत्तात्मक आग्रहों का खुला विरोध हो, जो संस्कृति और सम्मान के नाम पर स्त्रियों की बढ़ती दावेदारी को रोकना चाहते हैं.

बहाना दिल्ली का, बात बिहार कीसभा में एक परचा वितरित किया गया, जिसमें कहा गया है- ''यौन उत्पीड़न से जुड़े अपराधों का 'ग्राफ़' बिहार के कथित सुशासन में काफ़ी ऊपर चढा है. यहाँ शहर से लेकर गांवों तक सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या की घटनाओं में ख़ासी वृद्धि हुई है. इसलिए दिल्ली की घटना के विरोध में उभरे जनाक्रोश को बल देने के लिए बिहार से भी आवाज़ बुलंद करने का समय आ गया है.'' स्थानीय गाँधी संग्रहालय में मंगलवार शाम पटना के कई जाने-माने नागरिकों ने एक बैठक में निर्णय लिया कि वे यहाँ यौन हिंसा विरोधी मुहिम में सक्रिय हिस्सेदारी निभाएंगे. बैठक में प्रसिद्ध कवि आलोक धन्वा, कथा लेखिका उषा किरण खान, जानीमानी समाज सेविका सुधा वर्गिज़, प्रोफ़ेसर विनय कंठ, डॉ सत्यजीत, पूर्व पुलिस अधिकारी रामचंद्र खान, प्रोफ़ेसर भारती एस. कुमार, रंगकर्मी जावेद अख्तर खान और मीना तिवारी समेत कई अन्य प्रमुख नागरिक मौजूद थे. इसबीच राज्य के कई ज़िलों में आम लोगों, ख़ासकर युवा छात्र-छात्राओं ने बलात्कारियों के विरोध में सड़कों पर रोषपूर्ण प्रदर्शन किए हैं.
 

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