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गूगल की 'खोज' का भविष्य

BBC Hindi | Jun 13, 2012, 12:45PM IST
 
 

इंटरनेट पर खोज करने वाला दुनिया का सबसे लोकप्रिय सर्च इंजन गूगल भविष्य में बड़े बदलाव की योजना बना रहा है. गूगल अपनी खोजों को और समझदार बनाने की कोशिश कर रहा है और इसके लिए कंपनी ने पिछले महीने अमरीका में 'नॉलेज ग्राफ' नाम की खास सेवा भी शुरु की है. कंपनी के खोज विभाग के प्रमुख अमित सिंघल ने बीबीसी के लियो केलियोन से खास बातचीत में गूगल की योजनाओं के बारे में बताया. पहले सर्च इंजन शब्दों के मतलब को ठीक से नहीं समझ पाते थे, आप कृत्रिम बुद्धि से इसे कैसे बदलना चाह रहे हैं?कंप्यूटर एस्की जैसे कोड का इस्तेमाल करके लिपियों को स्ट्रिंग की तरह दर्शाने में महारत रखते हैं जबकि इंसान का दिमाग चीज़ों या वस्तुओं को बेहतर समझता है. दो साल पहले हमने फ्रीबेस नाम की एक कंपनी को खरीदा जो वस्तुओं को खास तरह से दर्शाता है. अब हम अपने उस सपने के करीब आ गए हैं जिसमें खोज को स्ट्रिंग की बजाए वस्तुओं के बारे में बनाया जा सकेगा. फ्रीबेस के पास उस वक्त 1.2 करोड़ चीजें मौजूद थी जो अब बढ़कर 20 करोड़ हो गई है. हम एक खास तरह का नॉलेज ग्राफ बना रहे हैं. उदाहरण के तौर पर डेविड कैमरन को खोजेंगे तो वो इंग्लैंड के प्रधानमंत्री है और ये खोज उसे भी दर्शाएगा. क्या ये ऩॉलेज ग्राफ डेविड कैमरन को उसी तरह से समझेगा जैसे हमारा दिमाग समझता है ?हमारा दिमाग किस तरह काम करता है ये हमें अभी भी ठीक से मालूम नहीं है. लेकिन इस नॉलेज ग्राफ की मदद से कंप्यूटर किसी चीज के बारे में ढेर सारी बातें बता सकेगा. जैसे अगर आप ताजमहल खोजते हैं तो वो बता पाएगा कि ताजमहल एक इमारत है, वो कहां पर है और आपको उसके बारे में क्या जानना चाहिए. कंप्यूटर सिर्फ आपको को वेबपेज का लिंक भर नहीं बढ़ा देगा.   गूगल की खोज बॉक्स में टाइप किए बिना भी हो सकेगी मुझे लगता है कि ये खोज की प्रक्रिया में एक कदम आगे बढ़ना है.

आज ज्यादातर लोग गूगल या दूसरे सर्च इंजन पर अपनी खोज बॉक्स में टाइप करके करते हैं. लेकिन हमने आपके डेमो में देखा कि उपयोगकर्ता द्वारा खुद से टाइप करके ढूंढने के बजाए नतीजे उसे उसकी स्थिति को देखते हुए आते रहते हैं. क्या भविष्य में खोज के लिए बॉक्स का इस्तेमाल कम से कम होता जाएगा ?


 

हम खोज को आसान बनाना चाहते हैं और गूगल का ऑटोकंप्लीट उस दिशा में एक छोटा कदम है. जैसे आप अंग्रेजी का डब्ल्यू टाइप करते हैं और आपको वेदर यानी मौसम बॉक्स में लिखा जाता है उसी तरह कई चीजें ऐसी है जिसे खोजने के लिए आपको पूरा लिखने की जरूरत नहीं होगी.


 

क्या आपका मानना है कि एक दशक में हमारी ज्यादातर खोजें खुद सर्च करने के बगैर ही हो जाएगी ?


 

ये एक सपना है जो दस साल में पूरा हो सकता है लेकिन इसके बारे में कहा नहीं जा सकता. हम इंटरनेट युग में जी रहे हैं जहां 10 साल आम जीवन के 100 साल के बराबर है.


 

भविष्य में और क्या हो सकता है ?

हम एक बेहतरीन मोड़ पर खडे हैं जहां अलग-अलग तरह की तकनीकें विकसित हो रही हैं जैसे की मोबाइल की तकनीक, नेटवर्क, आवाज पहचानने यानी स्पीच रिकगनिशन, पहनने के लायक कंप्यूटर यंत्र की तकनीक आदि. मेरा मानना है कि जब इस सभी चीज़ों को जोड़ दिया जाएगा तो पांच साल बाद हम कंप्यूटर का किस तरह इस्तेमाल करते हैं वो पूरी तरह से बदल जाएगा. भविष्य में जब पहनने के लायक कंप्यूटर यंत्र आएंगे तो वो एक रोमांचक समय होगा.

 
 
 

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