दीदी का दूसरा दांव भी हुआ फेल

चेन्नई/नई दिल्ली/कोलकाता. पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी ने भी तृणमूल कांग्रेस चीफ ममता बनर्जी को झटका दिया। उन्होंने रविवार को कहा कि वे उपराष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ेंगे। उधर, एनडीए की सोमवार को सुबह 11 बजे होने वाली बैठक में प्रत्याशी के नाम पर विचार किया जाएगा।
कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए ने शनिवार को उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को उम्मीदवार बनाए जाने का ऐलान किया। इसके एक दिन बाद गांधी ने कहा, 'मैं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को धन्यवाद देना चाहता हूं। जो उन्होंने उपराष्ट्रपति चुनावों के लिए मेरे नाम पर विचार किया।
कुछ अन्य लोगों ने भी मुझसे संपर्क किया था, लेकिन मैंने मना कर दिया। घोषणा के बाद मैंने हामिद अंसारी से बात की। उन्हें शुभकामनाएं दी।' यह ममता को दूसरा झटका है। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए एपीजे अब्दुल कलाम का नाम चलाया था। लेकिन बाद में उन्होंने भी चुनाव लडऩे से इनकार कर दिया था।
शिवसेना और जद-यू रहेंगे भाजपा के साथ
राष्ट्रपति चुनावों में यूपीए उम्मीदवार को समर्थन दे रहे शिवसेना और जद-यू ने संकेत दिए हैं कि वह एनडीए के फैसले का पालन करेंगे। जद-यू अध्यक्ष और एनडीए के संयोजक शरद यादव ने कहा कि उपराष्ट्रपति चुनाव और प्रणब मुखर्जी का मुद्दा जुदा-जुदा है।
राजनीति शुरू करने से अब तक मैंने कभी भी कांग्रेस की लाइन को समर्थन नहीं दिया है। हम मुखर्जी को उनके राजनीतिक अनुभव की वजह से समर्थन दे रहे हैं। दूसरी ओर शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि उपराष्ट्रपति चुनावों के लिए शिवसेना एनडीए के साथ है। राष्ट्रपति चुनावों में शिवसेना ने 2007 में भी एनडीए की लाइन से हटकर यूपीए की उम्मीदवार प्रतिभा पाटील को समर्थन दिया था।
ममता को मिला दादा का पत्र
राष्ट्रपति चुनाव के लिए महज तीन दिन रह गए हैं। इस बीच यूपीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी ने रविवार को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से समर्थन मांगते हुए उन्हें फिर पत्र लिखा। मुखर्जी ने अपने पत्र में कहा, 'राष्ट्रपति दलगत राजनीति से ऊपर होता है। एक मौका दीजिए। मेरा प्रयास होगा कि इस पद के मूल्यों-ईमानदारी, निष्पक्षता और हमारे संविधान की भावना सर्वधर्म समभाव को प्रोत्साहन देना-की रक्षा की जाए।' पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने इस पत्र को अपने फेसबुक पेज पर यह कह कर लगा दिया है कि उन्हें यह आज ही प्राप्त हुआ है।
प्रणब ने कहा, 'यदि मेरे चुनाव का कोई अर्थ है तो यह केवल मातृभूमि के प्रति हमारी साझा सेवा का हिस्सा है। इसी भावना के वशीभूत मैं आपका मूल्यवान सहयोग मांग रहा हूं।' उन्होंने लिखा कि वह इस बात को लेकर सम्मानित महसूस कर रहे हैं कि यूपीए के सहयोगियों और अन्य दलों ने उन्हें इस पद के लिए योग्य समझा।'
उधर, भुवनेश्वर में प्रणब मुखर्जी के प्रतिद्बंद्बी पीए संगमा ने दावा किया कि उन्हें 18 राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है और कुछ कांग्रेस के नेता भी उन्हें वोट देंगे। संगमा ने सत्तारूढ़ बीजद के सांसदों और विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि वह 1969 की परिस्थिति के दोहराए जाने को लेकर आशावान हैं जब वीवी गिरी ने कांगे्रस के आधिकारिक उम्मीदवार को हरा दिया था।






