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हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम को बना सकते हैं सरल

मणिकरन सिंघल, सर्ट | Oct 13, 2012, 02:50AM IST
हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम को बना सकते हैं सरल

1 बीमा कंपनी या टीपीए-थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर को सूचित करें और अगर यह नियोजित हॉस्पिटलाइजेशन है तो एडवांस में बताएं। अस्पताल या टीपीए स्टाफ पर निर्भर न रहें क्योंकि कई बात तो उन्हें पता ही नहीं होती कि इंश्योरेंस टाई-अप है या नहीं। कैश लेस क्लेम की मंजूरी तक इंतजार करें। अन्यथा वह कुछ ही घंटे बाद आपको दुखी स्वरों में बताएंगे कि वह बीमा कंपनी के पैनल में नहीं हैं।
2 अगर आपकी बीमा कंपनी टीपीए से संबंधित है तो बेहतर रहेगा कि एक फाइल बनाएं और उसमें हर साल की पॉलिसी डॉक्यूमेंट रखें। चूंकि बीमा कंपनी टीपीए बदलती रहती है इसलिए आपको ही सारे कागजात जुटाने होंगे और कई बार टीपीए भी आपसे पूर्व क्लेम की जानकारी आपके क्लेम करने के समय मांगते हैं। अगर जानकारी आपके पास नहीं होगी तो इसे बीमा कंपनी से मांगेंगे और इस प्रक्रिया में हुए विलंब से कैश लेस निवेदन रिजेक्ट हो भी सकता है।
3 हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के क्लेम से संबंधित सभी कागजात तैयार रखिए। अगर उस उपचार के लिए क्लेम में समस्या है जो कि प्री-एक्जिस्ंिटंग है तो बीमा कंपनी पहले के उपचार व सलाह से संबंधित सभी कागज मांग सकती है। फस्र्ट डायग्नोसिस रिपोर्ट तो वह मांगेंगे ही।
4 अधिकांश मामलों में टीपीए के जुड़े रहने से प्रक्रिया में विलंब होता है, खास तौर से वैसे मामलों में जिनमें क्लेम की रकम बड़ी होती है। दरअसल टीपीए को एक निश्चित सीमा तक क्लेम मंजूर करने का अधिकार होता और उस सीमा के ऊपर के सभी मामलों की मंजूरी बीमा कंपनी देती है लिहाजा इस प्रकार के मामलों में दुगुना समय लग जाता है।
5 सेवा की गुणवत्ता में कमी की वजह से अधिकांश बीमा कंपनियां व टीपीए आपके क्लेम को अस्पताल के उन कागजातों की जरूरत की वजह से भी पेंडिंग रख देते हैं जो कि आपने संभवत: उन्हें जमा भी कर दिया होता है। लिहाजा अगर आप अपने क्लेम का जल्द निपटान करवाना चाहते हैं तो टीपीए व बीमा कंपनी के संपर्क में बने रहें। इन दोनों के पास आपका मोबाइल नंबर व ई-मेल रहना चाहिए ताकि वे किसी समस्या की दशा में तत्काल आपसे संपर्क कर सकें।
6 कई बार जब क्लेम की रकम बड़ी होती है तब बीमा कंपनी इलाज करने वाले डॉक्टर से ऐसे पत्र की मांग करती है जिसमें लिखा गया हो कि ऐसी हालत में हॉस्पिटलाइजेशन या सर्जरी जरूरी है। इसलिए, डॉक्टर को यह बता कर रखिए कि बीमा कंपनी की मांग पर आप उससे फिर मिल सक ते हैं।
7 क्लेम के सभी कागजातों के जमा करने पर क्लेम को अधिकतम 30 दिनों में स्वीकृत/अस्वीकृत होना होता है। बीमा कंपनी की शिक ायत सेल का पता और फोन नंबर नोट करके रखिए ताकि 30 दिन के  बाद आप उसकी प्रक्रिया शुरू कर सकें।
आज के जमाने में हम हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ऑनलाइन कुछ क्लिक के जरिए खरीद सकते हैं पर इसका क्लेम करना उतना सरल नहीं है। क्लेम की प्रक्रिया तब और भी बुरी लगती है जब आपका प्री-ऑथराइजेशन फॉर्म नामंजूर हो जाता है जिसका मतलब यह होता है कि आपको कैश लेस सुविधा नहीं मिलेगी परंतु आपको बाद में भरपाई के लिए क्लेम करना होगा।


निजी तौर पर मैंने क्लेम के मामले देखे हैं और यह पाया है कि भरपाई के मामले में आपको बहुत धैर्य रखना होता है। वैसे तो कंपनियां यह दावा करती हैं कि वे प्री-ऑथराइजेशन के निवेदन पर कागजात जमा करने के 4 घंटे के अंदर फैसला सुना देंगी पर वही कंपनियां भरपाई के मामलों में क्लेम करने के बाद 40 दिन तक जवाब नहीं देती हैं।


पर इसका मतलब यह कतई नहीं कि हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ही न खरीदें या फिर यह कहें कि सभी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां ठीक हैं। यह बात तो दरअसल दूसरे लोगों के अनुभव से सीखने से होती है ताकि जब आपको अपनी पॉलिसी के लिए क्लेम करना हो तो आप ठीक से तैयार रहें।


हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी या कि आम भाषा में मेडिक्लेम के नाम से जाना जाने वाला एक ऐसा बीमा कवर है जो कि प्रत्येक व्यक्ति के पास होना ही चाहिए। पर इसी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का क्लेम करते समय आप अगर निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेंगे तो बेहतर रहेगा। पर यह बातें उस कंपनी की वेबसाइट पर उल्लिखित क्लेम प्रक्रिया के अतिरिक्त है कृपया इसे भी ध्यान में रखें।
अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का क्लेम करना उन लोगों के लिए एक बुरा अनुभव हो सकता है जिन्हें प्रक्रिया की जानकारी नहीं होती या फिर जो लोग जल्दबाज प्रवृति के  होते हैं। अगर आपने पॉलिसी एजेंट या एडवाइजर के जरिए ली है तो इनमें से कई मामलों में, खास तौर से कंपनी के साथ समन्वय करने में वह सहयोग करेगा।


पर अगर पॉलिसी आपने खुद या ऑनलाइन खरीदी है तो निश्चित रूप से इन सारी प्रक्रिया का पालन व पूर्ति आपको ही करनी होगी। वैसे आपके लिए सुझाव है कि आपको आकस्मिक निधि का इंतजाम भी करके रखना चाहिए ताकि हेल्थ क्लेम के विलंबित होने में आपको परेशानी का सामना न करना पड़े।


मणिकरन सिंघल


लेखक सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर और फाइनेंशियल प्लानर्स गिल्ड इंडिया के सदस्य हैं।

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