
राजभवन ने आधिकारिक तौर पर इस घटना के बारे में कुछ नहीं कहा है.
ये घटना 6 फरवरी की आधी रात की है जब झारखण्ड के राज्यपाल सैय्यद अहमद दिल्ली गए हुए थे. रात को खाना खाने के बाद वह झारखण्ड भवन की पहली मंज़िल पर स्थित अपने वीआईपी कमरे में आराम कर रहे थे कि अचानक आधी रात को उन्हें लगा कि उनके दाहिने हाथ की ऊँगली को किसी चीज़ नें जोर से काटा है.
आधी रात को झारखण्ड भवन में इस घटना के बाद अफ़रा तफ़री मच गयी.
पहले तो ये पता नहीं चल पा रहा था कि किस चीज़ नें राज्यपाल को काटा है. बाद में सभी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि 'महामहिम' के हाथ की ऊँगली को चूहे नें ही काटा है.
हालांकि राज्य सरकार और राज भवन से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है, मगर राज भवन के सूत्रों का कहना है अगले दिन सुबह वंसत विहार के ही 'होली एंजेल्स' अस्पताल के डॉक्टरों नें राज्यपाल के ज़ख्म की जांच की और उन्हें चूहे के काटने के लिए बनी कुछ निरोधक दवाएं भी दी.
झारखण्ड सरकार के एक अधिकारी नें बीबीसी को बताया कि 'घटना की जांच की जा रही है'. हांलाकि उनका कहना था कि राज्यपाल के हाथ को चूहे द्वारा क़तर लिया जाना राज्य सरकार के लिए शर्मिंदगी की बात है.
मगर सूत्रों का कहना है कि ये मामला यहीं ख़त्म नहीं हुआ. चूहों नें अगले दिन झारखण्ड भवन के एक बावर्ची को भी अपना शिकार बनाया.
इस मामले को लेकर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस काफी गंभीर है.
पूर्व विधायक और राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुखदेव भगत का कहना है कि सिर्फ्र राज्यपाल ही नहीं, झारखण्ड भवन में जाकर रुकने वाले कई लोगों नें शिकायत की है कि उन्हें चूहों नें काटा है.
बीबीसी से बात करतें हुए वह कहते हैं "ये गंभीर मामला है. चूहों ने राज्यपाल से लेकर बावर्ची तक को नहीं छोड़ा है. इस मामले को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए. आखिर झारखण्ड भवन के आयुक्त और प्रशासक क्या कर रहे हैं? जब उन्हें शिकायतें मिल रहीं थीं तो उन्होंने चूहों के ख़िलाफ अभियान क्यों नहीं चलवाया? "
भगत नें मांग की है कि घटना के बाद झारखण्ड भवन के पूरे अमले को बदल देना चाहिए.