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जिम्मेदारियां बढऩे पर करते चलें बीमा कवर में इजाफा

राजेश विक्रांत - मुंबई | Dec 08, 2012, 02:33AM IST

जानकारों के मुताबिक जो असली बीमा है वह टर्म इंश्योरेंस ही है। टर्म इंश्योरेंस वास्तव में बेसिक इंश्योरेंस है। बीमा के अन्य रूप मसलन- यूलिप, मनी बैक, ग्रुप इंश्योरेंस, मेडिकल इंश्योरेंस, वाहन बीमा, पेंशन प्लान तो काफी बाद में आए। जीवन बीमा का सबसे सस्ता और उपयुक्त जरिया है टर्म इंश्योरेंस।


अन्य बीमा भी है जरूरी
मजे की बात यह है कि टर्म इंश्योरेंस स्वास्थ्य बीमा पोर्टफोलियो का भी अभिन्न अंग माना जाता है। जानकारों का कहना है कि हेल्थकेयर की बढ़ती कीमतों के साथ ही आज के जमाने में हरेक इंसान के पास पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज होना जरूरी है। इस ध्येय के लिए आदर्श तौर पर एक टर्म प्लान, एक हेल्थ पॉलिसी और एक एक्सीडेंट बीमा पॉलिसी लेना पर्याप्त होता है।


बीमा और निवेश अलग रखें
आपको हमेशा यह ध्यान रखना है कि बीमा और निवेश या बचत दोनों बिल्कुल अलग-अलग चीजें हैं। इन दोनों को एक चश्में से नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि निवेश व बचत के जहां कई एवेन्यू यानी तरीके हैं वहीं जीवन बीमा का मूल तरीका सिर्फ एक ही है। बीमा मतलब सिर्फ बीमा ही समझना चाहिए।


जब भी खरीदें टर्म ही खरीदें
बीमा कवर के लिहाज से टर्म इंश्योरेंस एक आदर्श कवर है फिर भी इसके बारे में लोगों में जागरूकता बहुत कम है। जीवन बीमा कंपनियों के एजेंट भी टर्म इंश्योरेंस के बारे में जिक्र करने से कतराते हैं। इसकी बजाय वे ऊंचे कमीशन की योजनाएं बेचने में दिलचस्पी रखते हैं। यही कारण है कि जीवन बीमा कंपनियों की कुल बिक्री में टर्म इंश्योरेंस का हिस्सा सिर्फ 5 फीसदी ही होता है। लिहाजा आपके लिए बेहतर सलाह यह है कि जब भी जीवन बीमा खरीदें टर्म बीमा ही खरीदें।


यह कैसे काम करता है
मान लीजिए अपने 30 साल की उम्र में 10 साल के लिए 10 लाख रुपए सम एश्योर्ड का टर्म प्लान लिया है। मान लेते हैं कि इस पॉलिसी के लिए आप सालाना 3,000 रुपये का प्रीमियम देते हैं। अगर आपकी मृत्यु 10 साल के भीतर हो जाती है तो आपके आश्रितों/नॉमिनी, कानूनी उत्तराधिकारी को 10 लाख रुपये मिलेंगे और यदि आप 10 साल तक जीवित रहते हैं तो आपको कुछ नहीं मिलेगा।


टर्म इंश्योरेंस व अन्य पॉलिसियों में फर्क
अन्य जीवन बीमा पॉलिसियों से टर्म इंश्योरेंस एकदम अलग हैं। अन्य पॉलिसियों में जहां मैच्योरिटी या बीमा धारक की असामयिक मृत्यु के बाद उसके नॉमिनी को एकमुश्त रकम यानी बोनस आदि समेत सम एश्योर्ड प्राप्त होता है वहीं टर्म इंश्योरेंस की मैच्योरिटी वैल्यू शून्य होती है। पर यदि भविष्य में, भगवान न करें कि बीमा धारक इस दुनिया में न रहे तो, टर्म इंश्योरेंस उसके आश्रित/परिवार/नॉमिनी को आर्थिक चिंता से एकदम मुक्त कर देता है। वैसे कुछ बीमा कंपनियों ने ऐसी टर्म पॉलिसी भी पेश की है जिसमें मैच्योरिटी पर प्रीमियम की राशि बीमा धारक को मिल जाती है। पर इस पॉलिसी की लागत अधिक होती है। इसका प्रीमियम भी टर्म इंश्योरेंस के मुकाबले काफी अधिक होता है।


टर्म इंश्योरेंस का प्रीमियम 50 फीसदी तक कम
चूंकि टर्म इंश्योरेंस बीमा का शुद्ध रूप होता है-विशुद्ध रिस्क कवर। इसमें बचत करने या निवेश करने का कोई तत्व नहीं होता है। लिहाजा इसके प्रीमियम काफी सस्ते होते हैं। बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) के सौजन्य से पिछले चार सालों में कम प्रीमियम के चलते टर्म इंश्योरेंस काफी लोकप्रिय बन गए हैं। इसलिए इसके प्रीमियम रेट लगातार कम हुए हैं। टर्म इंश्योरेंस की कुछ योजनाओं में तो यह कमी तकरीबन 50 फीसदी तक हो गई है।


कितना हो आपका कवर?
जानकारों का कहना है कि आपके बीमा पोर्टफोलियो में टर्म इंश्योरेंस आपकी सालाना आय का  कम से कम15 गुना होना चाहिए। भगवान न करें कि आप इस दुनिया में न रहें तो आपकी नॉमिनी टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी से मिलने वाली रकम को निश्चित मासिक आय वाली किसी योजना में निवेश कर सकती है। इससे उसकी आर्थिक चिंता कम हो सकती है।


जिम्मेदारियों के अनुसार बढ़ाएं कवर
आपके लिए बेहतर सलाह है कि टर्म इंश्योरेंस कम उम्र में खरीदें। क्योंकि उम्र बढऩे के साथ टर्म इंश्योरेंस कवर का प्रीमियम भी बढ़ता जाता है। 50 प्लस के एज ग्रुप में टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम ज्यादा होता है। इसलिए जानकारों का कहना है कि टर्म इंश्योरेंस कम उम्र में लें और इसके सम एश्योर्ड कवर में हर साल 5 फीसदी की वृद्धि करते रहें।

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