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लापता नवरुणा का सौ दिन बाद भी सुराग नहीं

BBC Hindi | Dec 27, 2012, 13:45PM IST

पटना। पूरे सौ दिन बीत गए, पर घर से उठा ली गई नवरुणा कहाँ और किस हाल में है, पुलिस को अब तक पता नहीं. इस 11 साल की छात्रा का बीते 18 सितम्बर की रात बिहार के मुजफ्फरपुर से अपहरण कर लिया गया था. लड़की सुरक्षित बरामद हो, इसके लिए मुजफ्फरपुर से दिल्ली तक प्रशासन और सरकार से गुहार लगाई गई, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला है. मां-बाप चिंता में हैं कि बेटी ज़िंदा भी है या नहीं. बीते 100 दिनों में पुलिस इतना ही कर पाई है कि परिजनों के शक के आधार पर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें से दो पड़ोसी हैं और एक दूर के रिश्तेदार. इनसे कुछ ख़ास जानकारी की सूचना नहीं है. साथ ही पुलिस ने नवरुणा के घर के पास एक नाले से महीने भर पहले बरामद मानव-हड्डियों को फ़ॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है. जांच-रिपोर्ट अब तक नहीं आई है.

क्या कहती है पुलिस?पुलिस को शक था कि उन हड्डियों का संबंध इस मामले से हो सकता है. लेकिन सामान्य तर्क-बुद्धि से वहां लोग यही कह रहे थे कि वो हड्डियां बहुत पुरानी और किसी पुरुष के कंकाल का हिस्सा लग रही थीं. मुजफ्फरपुर के पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने गुरुवार सुबह बीबीसी से कहा कि जब तक उन हड्डियों की फ़ॉरेंसिक जांच रिपोर्ट नहीं मिल जाती, तब तक कुछ स्पष्ट कहना सही नहीं होगा. इस मामले में राजेश कुमार ने बताया, ''नवरुणा के पिता अतुल्य चक्रवर्ती ने इस तथ्य को पुलिस से छिपाया है कि वो अपने आवासीय भूखंड को तीन लोगों के हाथ बेचने और एक आदमी से 21 लाख रूपए लेने के विवाद में फंसे थे. हो सकता है कि इस अपहरण का संबंध उस विवाद से भी हो और पुलिस उस दिशा में भी जांच कर रही है.'' पिता का दर्दउधर अतुल्य चक्रवर्ती से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने पुलिस अधीक्षक की इस बात को बकवास करार देते हुए इस मामले में सफेदपोश अपराधी भू-माफिया के साथ पुलिस की साठ-गांठ का आरोप लगाया. नवरुणा के पिता कहते हैं, ''हमने अपने पाँचों भाइयों की सहमति से इस आवासीय भूखंड का बंटवारा किया है. अब कुछ लोग हमें डरपोक बंगाली समझकर डरा-धमकाकर यहां से भगाने और फिर ज़मीन-मकान हड़प लेने की साजिश में जुटे हैं. इसलिए लगता है कि दबाव बनाने के लिए मेरी बेटी का अपहरण किया गया.'' वे कहते हैं, ''पुलिस उन अपराधियों पर हाथ डालने के बजाए मुझे और मेरे परिवार को ही तंग-तबाह करने पर उतारू दिख रही है. पहले पुलिस ने प्रेम-प्रसंग की कहानी गढ़ी और अब घर के पास किसी की हड्डियां फेंककर या ज़मीन-मकान विवाद बताकर अपना और अपराधियों का असली चेहरा छिपा रही है.'' अतुल्य चक्रवर्ती बेहद दुखी और काफ़ी क्षोभ में लगे. वे कहते हैं, ''बेटी जीवित मिल जाने के आश्वासन और सांत्वना के बोल सुनते-सुनते अब थक चुका हूं और कहीं इसी थकान में दम न निकल जाए.''
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