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मोतीलाल नेहरू के सिद्धांत मानते हैं तो संस्थाओं का करें सम्मान : राष्ट्रपति
Bhaskar News
| Sep 26, 2012, 16:52PM IST

तैयार भाषण से हटकर राष्ट्रपति ने नेहरू आयोग की रपट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1919 और 1928 के सत्रों में मोतीलाल की भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने मोतीलाल के अपने बेटे जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के साथ वैचारिक मतभेद का भी उल्लेख किया। मुखर्जी ने कहा कि हम यदि मोतीलाल के सिद्धांतों का पालन करते हैं, संस्थाओं का सम्मान करते हैं, संस्थाओं को मजबूत बनाते हैं तो उनकी 150वीं वर्षगांठ पर यही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा। खुद को इतिहास का छात्र बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मोतीलाल की स्वराज पार्टी ने विधायी परिषद में अनुशासित बल का काम किया। लोकलेखा समिति की व्यवस्था विकसित करने का श्रेय मोतीलाल को ही जाता है जो इस समय सबसे प्रभावशाली 'वॉचडाग' है। मुखर्जी ने कहा कि 1861 से 1869 के बीच भारत में रवींद्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद, मोतीलाल नेहरू, मदन मोहन मालवीय और महात्मा गांधी जैसी महान हस्तियां आईं, जो काफी लोकप्रिय हुईं।
समारोह में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि मोतीलाल उन नेताओं में से हैं, जिनकी उपलब्धि को आधुनिक भारत ने नजरअंदाज कर दिया। सोनिया ने कहा कि मोतीलाल नेहरू सांप्रदायिक सद्भाव और धर्मनिरपेक्षता के लिए प्रतिबद्ध थे। उन्होंने जाति, समुदाय और धर्म से ऊपर उठकर कार्य किया। वह मानते थे कि देश समुदाय से ऊपर है।
सिक्के और डाक टिकट जारी
संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित इस समारोह में रक्षा मंत्री एके एंटनी, वित्त मंत्री पी चिदंबरम, मानव संसाधन विकास, आईटी एवं संचार मंत्री कपिल सिब्बल, संस्कृति मंत्री कुमारी सैलजा और राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष कर्ण सिंह भी उपस्थित थे। चिदंबरम ने इस मौके पर मोतीलाल को समर्पित सिक्के जारी किए तो सिब्बल ने उनकी स्मृति में डाक टिकट जारी किया।






