शेल गैस पॉलिसी इसी महीने
सूरतेहाल
अनुमान के मुताबिक भारत में करीब 290 टीसीएफ शेल गैस मौजूद है
इसमें से करीब 63 टीसीएफ शेल गैस का उत्पादन हो सकता है
इस समय देश में खपत का 25 फीसदी प्राकृतिक गैस आयात किया जाता है
शेल गैस की खोज और उत्खनन को बढ़ावा देने के लिए नीति बनाई जा रही है
फायदा- घोषणा के बाद नेचुरल गैस उत्पादन में बढ़ोतरी की गुंजाइश
बहुत दिनों से प्रतीक्षा की जा रही शेल गैस से संबंधित नीति की घोषणा इस महीने के अंत तक कर दी जाएगी। इसकी जानकारी केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सचिव जी. सी. चतुर्वेदी ने दी। इस नीति की घोषणा हो जाने से देश में प्राकृतिक गैस का उत्पादन बढऩे की गुंजाइश है। इंडिया एनर्जी फोरम और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित 11वें पेट्रो इंडिया कार्यक्रम के दौरान चतुर्वेदी ने बताया कि सरकार ने शेल गैस से संबंधित नीति को अंतिम रूप दे दिया है। इसी महीने के अंत तक यह सबके सामने आ जाएगा।
यूएस एनर्जी इंटरनेशनल एजेंसी के एक अनुमान के मुताबिक भारत में करीब 2,900 खरब घन फुट (290 टीसीएफ) शेल गैस मौजूद है, जिसमें से 63 टीसीएफ शेल गैस निकाला जा सकता है। वर्ष 2011-12 के दौरान भारत में 135 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (एमएमएससीएमडी) थी, जबकि जरूरत करीब 200 एमएमएससीएमडी की आंकी गई है।
इस समय देश में खपत का 25 फीसदी प्राकृतिक गैस आयात किया जाता है। मांग और आपूर्ति के इसी अंतर को भरने के लिए शेल गैस की खोज और उत्खनन को बढ़ावा देने के लिए नीति बनाई जा रही है।
इंडियन हाइड्रोकार्बन विजन के मुताबिक देश में ऊर्जा के प्राथमिक खपत में 9.5 फीसदी हिस्सा प्राकृतिक गैस क्षेत्र का है जो कि वर्ष 2015 तक बढ़ कर करीब 20 फीसदी हो जाएगा। यदि प्राकृतिक गैस की खपत वाले उद्योग पर नजर डालें तो करीब 65 फीसदी हिस्सा बिजली बनाने वाली और रासायनिक उर्वरक बनाने वाली कंपनियां कर रही हैं।
इन कंपनियों की मांग लगातार बढ़ रही है लेकिन विदेशों से आने वाले महंगे प्राकृतिक गैस की वजह से इसे खरीद नहीं पा रहे हैं। जब देश में ही इसका उत्पादन बढ़ेगा तो जाहिर है कि इसका दाम कम होगा।
मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि प्राकृतिक गैस का उपयोग बढ़ाना भी एक चुनौती है क्योंकि देश में अधिकतर बिजली घर इस समय कोयला से चल रहे हैं। कुल ऊर्जा खपत में भी कोयले की हिस्सेदारी 53 फीसदी है। लेकिन इसकी आपूर्ति घट रही है जबकि मांग बढ़ रही है, इसलिए आयातित कोयले पर निर्भरता बढ़ रही है जो महंगा है। इसके साथ ही पर्यावरण का भी मसला है। इसलिए एक न एक दिन प्राकृतिक गैस को ही अपनाना होगा।






