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छोटे कारोबारियों के लिए टैक्स प्लानिंग

जितेंद्र सोलंकी | Oct 27, 2012, 01:37AM IST
छोटे कारोबारियों के लिए टैक्स प्लानिंग

आयकर में बचत के परंपरागत तरीकों जैसे धारा 80सी, 80डी, 24 आदि के अलावा भी कई ऐसे तरीके हैं जिनके जरिए कर बचाया जा सकता है। छोटे कारोबारी भिन्न-भिन्न तरीकों से अपना कर बोझ कमकर सकते हैं। कामकाजी महिलाएं भी अपने परिवार के आयकर के भार को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। साल के अंत में परिवार के साथ घूमने का मजा लेते हुए भी आयकर में छूट हासिल की जा सकती है।
जब आप कारोबार करते हैं तो वह अपने सपने को सच बनाने जैसा ही है। स्वरोजगार के चलते  आप खुद के मालिक होते हैं जो आप हमेशा से ही बनना चाहते होंगे। रवि कुमार ने भी अपनी अच्छे वेतन वाली नौकरी छोड़ कर पांच साल पहले मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस शुरू किया। आजकल उनके यहां 40 कर्मचारी काम कर रहे हैं और वह संतुष्ट है। हालांकि, उन्हें बिजनेस से जो आय हो रही है वह उससे खुश हैं। उनकी चिंता की केवल एक वजह है टैक्स की उच्च दरें। इसमें उन्होंने चार्टर्ड अकाउंट की मदद ली जिसने उन्हें कारोबारियों के लिए उपलब्ध टैक्स छूट संबंधी फायदों के बारे में बताया। अब उनके कई चचेरे भाइयों ने कारोबार ज्वाइन कर लिया है।  रवि कुमार की चिंता अलग नहीं है पर छोटे कारोबारियों के लिए टैक्स एक अहम मुद्दा बन गया है। स्वरोजगारी होने की वजह से उनकी कुल आय बढ़ जाती है और उस पर उच्च दर पर टैक्स चुकाना पड़ता है। इसके बावजूद छोटे कारोबारियों के लिए टैक्स छूट के कई प्रावधान है जिससे वह अपनी कर योग्य आय को वेतनभोगी वर्ग की आय की तुलना में 10 से 15 फीसदी तक कम कर सकते हैं। यहां कुछ फायदे दिए गए हैं जिसके माध्यम से छोटे कारोबारी टैक्स के भार का कम कर सकते हैं।
बिजनेस के खर्चों का  क्लेम करें
स्वरोजगार में ऐसे बहुत से खर्च होते हैं जिसे कारोबारी टैक्स बचाने के नजरिए से क्लेम कर सकते हैं जिससे आयकर का बोझ कुछ कम हो सके। इस प्राथमिक छूट को बिजनेस एक्सपेंस के तौर पर क्लेम किया जा सकता है। इसमें किराया, टेलीफोन, इंटरनेट और यात्रा संबंधी ऑफिस के खर्चों को शामिल किया जा सकता है। हालांकि, इन सब के बीच अगर कोई निजी खर्च है तो उसे शामिल नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा व्यक्ति कंप्यूटर, फर्नीचर और कार आदि  पर डेप्रिसिएशन (मूल्य में होने वाली कमी) क्लेम कर सकता है। हालांकि यह सब क्लेम करते वक्त व्यक्ति को बिल देने होंगे। इस पर कोई फर्जी क्लेम नहीं किया जा सकता है। घाटे के एवज में कर छूट
इसके अलावा भी कई फायदे हैं। उदाहरण के तौर पर आपको नुकसान को अगले आठ साल तक कैरी फॉरवर्ड ले जाने और उसी हिसाब से कैपिटल गेन को समायोजित करने का फायदा मिलता है। यहां तक आश्रितों के इलाज (माता-पिता भी शामिल) या फिर किसी तरह की अक्षमता पर भी एक सीमा तक टैक्स छूट के लिए क्लेम किया जा सकता है। इस सभी फायदों का मकसद आपकी इकाई को टैक्स एफिशियंट बनाना है। आपको आयकर के नियमों का ध्यान रखना चाहिए जिससे बाद में असंतोष न हो। वित्त पर दबाव न पड़े इसके लिए शुरू से प्लानिंग करना जरूरी है।
सामान्य छूट
स्वरोजगार वाले लोगों के लिए धारा 80सी के तहत एक लाख रुपये तक की टैक्स छूट का प्रावधान है। व्यक्ति इसके तहत पीपीएफ, ईएलएसएस, एनएससी और एफडी में निवेश कर सकता है साथ ही लाइफ इंश्योरेंस की प्रीमियम पर भी टैक्स छूट का फायदा क्लेम किया जा सकता है। इस धारा में बच्चों की स्कूल फीस और होम लोन के मूलधन भुगतान भी शामिल है। फिलहाल सकल आय का 10' अगर न्यू पेंशन स्कीम में जा रहा है तो इस पर धारा 80सीसीडी के तहत टैक्स छूट का प्रावधान है। हालांकि, जब इसे धारा 80सी मे शामिल किया जाता है तो टैक्स छूट की सीमा एक लाख रुपये तक हो जाती है। इसके अलावा व्यक्ति परिवार और माता-पिता के हेल्थ इंश्योरेंस पर धारा 80डी के तहत टैक्स छूट का फायदा उठा सकता है। खुद के लिए और जीवन साथी और बच्चों के लिए सालाना प्रीमियम की सीमा 15,000 रुपये है जबकि माता पिता के हेल्थ इंश्योरेंस के लिए सालाना 15,000 रुपये तक के प्रीमियम भुगतान पर अतिरिक्त टैक्स छूट सीमा है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 20,000 रुपये तक की है। 
हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) बनाएं
टैक्स के बोझ को कम करने का यह काफी प्रभावशाली तरीका है। यहां तक की वेतनभोगी वर्ग भी इसका काफी इस्तेमाल करता है। एचयूएफ बनाकर एक अलग इकाई का निर्माण किया जा सकता है। इससे आय को दो अलग इकाई में बांटा जा सकेगा। इससे कुल आय में से कम से कम टैक्स कटेगा। हालांकि, एचयूएफ की स्थापना तभी की जा सकती है जबकि व्यक्ति की शादी हो चुकी और बच्चे भी हों जो कानूनी तौर पर करदाता के लाभार्थी हों। करदाता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इस विकल्प का इस्तेमाल कर चोरी के लिए न हो। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक अच्छे चार्टर्ड एकाउंटेंट की जरूरत पड़ेगी।
सदस्यों को शामिल करें
कई छोटे कारोबार परिवार के सदस्यों द्वारा चलाए जाते हैं। कई बार परिवार के अलग-अलग सदस्य अपनी क्षमता के हिसाब से कारोबार में अपना सहयोग देते हैं। अगर आप भी अपने कारोबार के लिए परिवार के सदस्यों की क्षमता का इस्तेमाल कर रहे हैं तो टैक्स का भार कम करने के लिए उन्हें कर्मचारी बना लें। कर्मचारियों को दी जाने वाले वेतन पर टैक्स छूट का प्रावधान है। साथ ही कारोबार की आय भी उस व्यक्ति के पास चली जाती है।
हाउसिंग लोन के ब्याज पर कर छूट
आयकर अधिनियम की धारा 24बी के तहत होम लोन के ब्याज भुगतान पर सालाना 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का फायदा उठाया जा सकता है। अगर यह दूसरा घर है तो इसके लिए कोई सीमा नहीं व्यक्ति संपूर्ण ब्याज भुगतान पर टैक्स छूट क्लेम कर सकता है।
हाउस रेंट
कई कारोबारी अपना बिजनेस शुरू करने की शुरुआती दौर में किराए के घर में रहते हैं। उनके लिए धारा 80जीजी के अंतर्गत कुछ शर्तों के अंतर्गत 24,000 रुपये की सालाना टैक्स छूट का प्रावधान किया गया है।
शिक्षा लोन के जरिए टैक्स सेविंग
आयकर अधिनियम की धारा 80ई के तहत आप अपने या फिर बच्चों की शिक्षा के लिए लिए जाने वाले लोन पर दिए जाने वाले पूरे ब्याज पर टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं। इस फायदे से आपके बच्चों के लिए भी मदद मिलती है और आपका टैक्स भार भी कम होता है। जितेंद्र सोलंकी 
सीएफपी, जे. एस. फाइनेंशियल एडवाइजर्स, दिल्ली

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