सरकार ने रोका नक्सल विरोधी अभियान

केंद्र की सोच
केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने हालात की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन, केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह भी मौजूद थे। गृह मंत्रालय ने अपहरण जैसे हालात से निपटने के लिए मानक प्रक्रिया तय करने का फैसला किया है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने सुकमा कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को नक्सलियों की कैद से छुड़ाने की पहल शुरू कर दी है। सोमवार को सरकार ने राज्य के बस्तर इलाके में नक्सल विरोधी अभियान पर रोक लगा दी। इस बीच खुफिया सूचना है कि कलेक्टर को रखे जाने की जगह का पता चल गया है। राज्य पुलिस मुख्यालय में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल पूरी कोशिश मेनन को छुड़ाने की है। बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान बाद में भी चलाया जा सकता है।
नक्सलियों ने शनिवार को मेनन को अगवा किया था। उन्होंने सरकार को मांगें मानने के लिए 25 अप्रैल तक का समय दिया है। मेनन की रिहाई के लिए 8 शर्तें रखी हैं। इनमें ऑपरेशन ग्रीन हंट रोकना और जेल में बंद आठ साथियों को रिहा करना शामिल है। राज्य के गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सरकार नक्सलियों की मांगों पर विचार कर रही है। अंतिम फैसला केंद्र सरकार और राज्य के सभी राजनीतिक दलों को भरोसे में लेने के बाद ही होगा। इसके लिए मुख्यमंत्री विपक्षी दलों से बात कर रहे हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक नक्सलियों ने जिन आठ साथियों की रिहाई की मांग की है वे सभी छत्तीसगढ़ के हैं। उनमें कोई बड़ा नक्सली नेता नहीं है। सूत्रों के मुताबिक कलेक्टर के रखे जाने की जगह का सुराग मिल गया है। करीब तीन सौ नक्&52द्भ;सलियों ने उन्हें घेर रखा है। छत्तीसगढ़ के नक्सल मामलों के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रामनिवास ने बताया, पुलिस को कलेक्टर के बारे में लगातार जानकारी मिल रही है। मेनन सुरक्षित हैं। नक्सली उन्हें लेकर लगातार जगह बदल रहे हैं।
मंत्री स्तरीय समिति : राज्य सरकार ने कलेक्टर को छुड़ाने के लिए मंत्री स्तरीय समिति बनाई है। मुख्यमंत्री रमन सिंह इसके प्रमुख हैं। उनके अलावा गृहमंत्री ननकी राम कंवर, आदिवासी कल्याण मंत्री राम विचार नेताम, शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल समिति के सदस्या हैं।
सेन की अपील : पीयूसीएल के उपाध्यक्ष डॉ. बिनायक सेन नक्सलियों से कलेक्टर को बिना शर्त छोडऩे की अपील की है। इसके अलावा तमिलनाडु के राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख कर मेनन सुरक्षित रिहाई की मांग की है।
नक्सली वन क्षेत्रों में बिना सुरक्षा के न जाने के निर्देश
यपुर सुकमा जिले के कलेक्टर के अपहरण एवं अन्य नक्सली घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने अधिकारी-कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे बिना सुरक्षा के जंगल में न जाएं। मुख्यालय से जारी निर्देश में कहा गया है कि जरूरी हो तो ही अमला जंगल में जाए और पूरी सावधानी बरतें। ग्राम सुराज अभियान में प्रशासनिक अमले के साथ ही वन विभाग के अधिकारी -कर्मचारी भी शामिल होते हैं। जंगल में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों का आना-जाना लगा रहता है। इसे देखते हुए वन संरक्षकों को यह निर्देश जारी किया गया है। खास तौर पर मैदानी अमले को सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है।
विभाग ने संवेदनशील इलाकों में वन अमले को प्रवेश के लिए कुछ टिप्स दिए हैं। इसमें कहा गया है कि वे फोर्स लेकर, पुलिस तथा अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देकर जंगल में जाएं। अति उत्साह में बिना सोचे-समझे कोई फैसला न लें। जहां तक संभव हो सके, जंगल में प्रवेश करने से बचें। रात होने से पहले सुरक्षित स्थान पर लौट आएं तथा स्थिति ठीक न हो तो दौरा रद्द कर दें। (ब्यूरो)





