दीपावली (26 अक्टूबर, बुधवार) पर देवी महालक्ष्मी तथा भगवान श्रीगणेश के साथ ही देहलीविनायक, दवात व कलम की पूजा करने का विधान भी है। इसकी विधि नीचे दी गई है-
देहलीविनायक पूजन-व्यापारिक प्रतिष्टानादि में दीवारों पर ऊँ श्रीगणेशाय नम:, स्वस्तिक चिह्न, शुभ-लाभ आदि मांगलिक एवं कल्याणकार शब्द सिन्दूर से लिखे जाते हैं। इन्हीं शब्दों पर ऊँ देहलीविनायकाय नम: इस नाममंत्र द्वारा गंध-पुष्पादि से पूजन करें।
श्रीमहाकाली (दवात) पूजन- स्याहीयुक्त दवात को भगवती महालक्ष्मी के सामने पुष्प तथा चावल के ऊपर रखकर उस पर सिंदूर से स्वस्तिक बना दें तथा मौली लपेट दें।
ऊँ श्रीमहाकाल्यै नम: -इस नाममंत्र से गंध-पुष्पादि पंचोपचारों से या षोडशोपचारों से दवात तथा भगवती महाकाली का पूजन करें और अंत में इस प्रकार प्रार्थनापूर्वक उन्हें प्रणाम करें-
कालिके त्वं जगन्मातर्मसिरूपेण वर्तसे।
उत्पन्ना त्वं च लोकानां व्यवहारप्रसिद्धये।।
या कालिका रोगहरा सुवन्द्या
भक्तै: समस्तैव्र्यवहारदक्षै:।
जनैर्जनानां भयहारिणी च सा लोकमाता मम सौख्यदास्तु।।
लेखनी पूजन-लेखनी (कलम) पर मौली बांधकर सामने रख लें और
लेखनी निर्मिता पूर्वं ब्रह्मणा परमेष्ठिना।
लोकानां च हितार्थय तस्मात्तां पूज्याम्यहम्।।
ऊँ लेखनीस्थायै देव्यै नम:
- इस नाममंत्र द्वारा गंध, पुष्प, चावल आदि से पूजन कर इस प्रकार प्रार्थना करें-
शास्त्राणां व्यवहाराणां विद्यानामाप्युयाद्यात:।
अतस्त्वां पूजयिष्यामि मम हस्ते स्थिरा भव।।
देहलीविनायक, दवात व कलम की पूजा करने के बाद बहीखाता, कुबेर पूजन तथा तुला(तराजू) का पूजन किया जाता है। इनकी विस्तृत पूजा विधि जानने के लिए रिलेटेड आर्टिकल पर क्लिक करें।
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