विज्ञापन
 
 
 
 

दीपावली पर ऐसे करें महालक्ष्मी की आरती

 
Source: धर्म डेस्क. उज्जैन   |   Last Updated 10:35(22/10/11)
 
 
 
 

दीपावली पर देवी महालक्ष्मी, भगवान श्रीगणेश, देहली विनायक, दवात, लेखनी, बही, कुबेर, तुला व दीपमाला पूजन के पश्चात महालक्ष्मी की आरती की जाती है।
आरती के लिए एक थाली में स्वस्तिक आदि मांगलिक चिह्न बनाकर चावल तथा पुष्पों के आसन पर शुद्ध घी का दीपक जलाएं। एक पृथक पात्र में कर्पूर भी प्रज्वलित कर वह पात्र भी थाली में यथास्थान रख लें, आरती- थाल के जल से स्वयं की शुद्धि करें (छिड़क लें)। पुन: आसन पर खड़े होकर अन्य पारिवारिक जनों के साथ घण्टानादपूर्वक निम्न आरती गाते हुए महालक्ष्मीजी मंगल आरती करें-
    श्रीलक्ष्मीजी की आरती
ऊँ जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसिदिन सेवत हर विष्णु-धाता।। ऊँ।।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।। ऊँ।।
दुर्गारूप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, रिद्धि-सिद्धि धन पाता।। ऊँ।।
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधिकी त्राता।। ऊँ।।
जिस घर तुम रहती, तहँ सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहिं घबराता।। ऊँ।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता।
खान-पान का वैभव सब तुमसे आता।। ऊँ।।
शुभ-गुण-मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहिं पाता।। ऊँ।।
महालक्ष्मी(जी) की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।। ऊँ।।
मंत्र पुष्पांजलि- दोनों हाथों में कमल आदि के पुष्प लेकर हाथ जोड़े और निम्न मंत्र का पाठ करें-
ऊँ या श्री: स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मी:
पापात्मनां कृतधियां ह्रदयेषु बुद्धि:।
श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा
तां त्वां नता: स्म परिपालय देवि विश्वम्।।
ऊँ श्रीमहालक्ष्म्यै नम:, मंत्रपुष्पांजलिं समर्पयमि।
- ऐसा कहकर हाथ में लिए फूल महालक्ष्मी पर चढ़ा दें। प्रदक्षिणा कर प्रणाम करें, पुन: हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थना करें-
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि।।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे।।
सरजिजनिलये सरोजहस्ते धनलतरांशुकगंधमाल्यशोभे।
भगवति हरिवल्वभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम्।।
पुन: प्रणाम करके ऊँ अनेन यथाशक्त्यर्चनेन श्रीमहालक्ष्मी: प्रसीदतु। यह कहकर जल छोड़ दें। ब्राह्मण एवं गुरुजनों को प्रणाम कर चरणामृत तथा प्रसाद वितरण करें।
विसर्जन- पूजन के अंत में अक्षत लेकर गणेश एवं महालक्ष्मी की नूतन प्रतिमा को छोड़कर अन्य सभी आवाहित, प्रतिष्ठित एवं पूजित देवताओं को अक्षत छोड़ते हुए निम्न मंत्र से विसर्जित करें-
यान्तु देवगणा: सर्वे पूजामादाय मामकीम्।
इष्टकामसमृद्धयर्थं पुनरागमनाय च।।
दीपावली पर देवी महालक्ष्मी, भगवान श्रीगणेश, देहली विनायक, दवात, लेखनी, बही, कुबेर, तुला व दीपमाला पूजन की विधि जानने के लिए रिलेटेड आर्टिक्लस पर क्लिक करें।



Related Articles:

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आपके विचार

 
 
कोड :
4 + 9

 
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

'ये जवानी है दीवानी'
लंदन के विभिन्न रंग
Just Added

हैलो..हैलो
इफ्तेखार स्मृति में आयोजित नाटय समारोह में रवीन्द्र भवन में बुधवार को नाटक एक ठग।
 
 
 
विज्ञापन
 
 
| Email  Print Comment
| Email  Print Comment
(1)
Latest | Popular